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युवाओं पर चर्चा नहीं तो किस बात की संसद !

युवाओं पर चर्चा नहीं तो किस बात की संसद !

नई दिल्ली, न्यूज प्लस। राहुल गांधी ने स्पीकर ओम बिरला से मिलने के बाद कहाकि युवाओं पर चर्चा नहीं तो किस बात की संसद, अखिलेश यादव ने कहाकि यह हिटलरशाही है। क्या विपक्ष के दोनों नेता ठीक बोल रहे हैं या सरकार सही है। आम जनता अब इसका आकलन कर रही है कि कौन युवाओं ते साथ है और कौन कोरी राजनीति कर रहै हैं।

जंतर-मंतर पर युवाओं का आंदोलन नया और बड़ा रूप ले चुका है। सरकार किसी भी तरह आंदोल समाप्त कराने की कशिश में है, इसीलिए उनसे बात करने के बजाय युवाओं को हतोत्साहित कर रही है। आंदोलन दबाने के लिए कल युवाओं पर सख्ती की गई और उनको डराने के लिए मुकदमे दर्ज किए गए। संभव है पुलिस अब उनकी गिरफ्तारी भी शुरू कर देगा, 70 से ज्यादा छात्र कल से पुलिस की हिरासत में हैं।

छात्रों के इस आंदोलन पर विपक्ष, सरकार पर हमलावर है। दोनों सदनों में युवाओं पर लाठीचार्ज पर चर्चा की मांग पर विपक्ष अड़ा है। राहुल गांधी आज इस पर चर्चा के लिए स्पीकर ओम बिरला से मिले, बाहर निकलकर बोले स्पीकर ने उनसे कहा सरकार से बात करके बताएंगे। राहुल गांधी ने कहाकि अगर अपने बच्चों और युवाओं पर चर्चा नहीं कर सकते तो सदन किस बात का। दूसरे तरफ सपा मुखिया अखिलेश यादव ने कहाकि सरकार हिटलर हो गई है जो अपने ही बच्चों को पीट रही है और उनसे बात नहीं कर रही है तो अरविन्द केजरीवाल ने कहाकि सरकार तानाशाह हो गई है जो अपने बच्चों को पिटवा रही है। यह सही है कि युवाओं के आंदोलन के बहाने विपक्ष राजनीति कर रहा है लेकिन यह मौका सरकार ने ही दिया है, विपक्ष का कहना है कि वह युवाओं पर अत्याचार को लेकर हमला कर रहा है और यह उसका अधिकार ही नहीं कर्तव्य भी है।

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