नई दिल्ली, न्यूज प्लस। लाठियां खायीं, करंट लगा, आसू गैंस के गोले झेले, लड़कियों के कपड़े फटे, पुलिस के साथ सादी वर्दी वालों से भी मार खायी फिर भी हजारों युवक-युवतियां दूसरे दिन जंतर-मंतर पर पहुंच गए। युवा अब किसी भी बरबरता के आगे झुकने को तैयार नहीं हैं। नई रणनीति के साथ युवा आंदोलन पर डटे हैं और वे किसी भी कीमत पर शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा चाहते हैं, अब तो कुछ युवा प्रधानमंत्री मोदी के इस्तीफे पर आ गए हैं।
कल यानी 20 जुलाई 2026 को सरकार का डर उस समय दिखा था जब देश के इतिहास में पहली बार संसद के सारे गेटों पर ताले डाल दिए गए। जंतर-मंतर से संसद तक कई जगह बेरीकेडिंग की गई और पुलिस के साथ अर्धसैनिक बल को लगाया गया। इसके बाद भी युवा संसद के करीब तक पहुंच गए, जब पुलिस को लगा युवा रुकने वाले नहीं हैं तो लाठीचार्ज और आसू गैस के गोले दागे गए। कुछ लोग सादे कपड़ों में पुलिस के साथ लाठियों से युवाओं को पीटते दिखे। लड़कियों तक को लाठियों से पीटा गया जिससे उनके कपड़े फट गए।
60 से ज्यादा युवा लापता है, माना जा रहा है पुलिस ने उनको कहीं हिरासत में रखा है। 70 से ज्यादा युवा घायल हैं, उनको गंभीर चोटें आयी हैं। इनमें कुछ अस्पताल में भर्ती हैं तो घायल होने के बाद भी कई युवा जंतर-मंतर पर आंदोलन में शामिल हैं। दूसरी तरफ पुलिस का दावा है कि छात्रों के पथराव में कुछ अधिकारियों समेत100 से ज्यादा पुलिस वाले गंभीर रूप से घायल हुए हैं और सरकारी संपत्ति का नुकसान हुआ है। पुलिस ने युवाओं के खिलाफ 6 एफआईआर दर्ज कराई हैं, इसके बाद भी युवा नहीं डरे और जंतर-मंतर पर डटे हैं।
छात्रों का यह जनून बताता है कि वह न तो पुलिस की बरबरता से डरने वाले हैं और न सरकार के सामने झुकने वाले हैं। कल तक सीजेपी के पदाधिकारी सरकार से बात करने जाने के लिए तैयार थे लेकिन इस बरबरता के बाद अब उन्होंने ऐलान किया है कि सरकार को बात करनी है तो जंतर-मंतर प्रतिनिधि भेजे। सरकार की तरफ से बयान आया है कि न तो वह बातचीत के लिए किसी को बुलाने वाली है और न बुलाया, न ही कोई आश्वासन दिया है। यह जरूर हुआ कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा आज अस्पताल में घायल युवाओं को देखने पहुंच गए, लेकिन दूसरी तरफ इस बरबरा से आहत सोनम वांगचुक ने अपना अनशन तोड़ने से इनकार कर दिया। पहले उन्होंने सरकार केसाथ वार्ता शुरू पर अनशन तोड़ने की घोषणा की थी। दूसरे दिन भी आंदोलन उसी जोश और ताकत के साथ जारी है, जिससे लग रहा है कि युवा अपनी मांगे पूरी करवाने के लिए अब किसी भी हद तक जाने की कसम खा चुके हैं।
