नई दिल्ली, न्यूज प्लस। सरकार मानसून सत्र में कई महत्वपूर्ण बिलों के साथ 130वां संविधान संसोधन बिल लाने की तैयारी में है, लेकिन इसके लिए लोकसभा में 360 और राज्यसभा में 161 का जादुई आकड़ा क्या हासिल कर पाएगी। इसके लिए एनसीपी में तोड़फोड़ और डीएमके व जगनमोहन रेड्डी को मनाकर पक्ष में करने के बाद भी सपा में सेंध लगानी होगी जो भाजपा के लिए यूपी चुनाव से पहले तो कम से कम बहुत मुश्किल काम है।
अप्रैल में सरकार का 131वां संविधान संसोधन बिल लोकसभा में गिरने के बाद भाजपा किसी भी तरह लोकसभा और राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत हासिल करने पर आमादा है। इसके लिए पार्टियों में तोड़फोड़ जारी है। बंगाल चुनाव हारने के बाद टीएमसी संकट में आयी तो उसके 20 सांसद तोड़ लिए, इसके बाद महाराष्ट्र में बाकायदा आपरेशन चलाकर उसके 9 में से 6 सांसद तोड़ डाले। इसी तरह आप के 7 राज्यसभा सांसद तोड़कर भाजपा ने वहां भी दो तिहाई बहुमत हासिल करने की पुरजोर कोशिश शुरू कर दी है।
20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलने वाले मानसून सत्र में भाजपा पिसीमन और महिला आरक्षण के लिए संविधान संसोधन बिल लाती है तो संविधान के अनुच्छेद 368के अनुसार उसे दो तिहाई बहुमत चाहिए होगा। इसके लिए लोकसभा में भाजपा (एनडीए) को 360 सांसदों का साथ चाहिए होगा। फिलहाल एनडीए के पास 318-319 सांसदों का समर्थन है यानी दो तिहाई बहुमत के लिए उसे अभी भी 41-42 सांसदों की जरूरत है। इसके लिए भाजपा पार्टियों में तोड़फोड़ के लिए किसी भी हद तक जा सकती है।
भाजपा की इसके लिए दो तरह की रणनीति हैं, एक कुछ दलों को तोड़ न पाए तो वोटिंग से दूर रहने के लिए मना ले। इसमें उसकी नजर डीएमके पर है जिसके पास 22 सांसद हैं। तमिलनाडु में कांग्रेस के डीएमके से नाता तोड़कर टीवीके के साथ सरकार में शामिल होने से डीएमके इंडिया गंठबंधन से नाराज है। ऐसे में भाजपा का मानना है कि उसे किसी तरह मनाया जा सकता है। इसके साथ उसकी नजर जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआरसीपी के चार सांसदों पर भी है, भाजपा के रणनीतिकारों का प्रयास है उनको भी मनाकर साथ लाया जा सकता है, नहीं तो कम से कम उनको वोटिंग से दूर रखने के लिए तो मनाया ही जा सकता है। अगर इसके अलावा शरद पवार की एनसीपी पर भी भाजपा की पैनी नजर है, यूटीबी के सांसद तोड़ने के बाद एनसीपी के सांसद तोड़ना उसे आसान लग रहा है और अगर सांसद न टूटें तो भी भाजपा का प्रयास होगा उनको वोटिंगके बहिष्कार के लिए राजी किया जा सकता है।
डीएमके, वाईएसआरसीपी और एनसीपी यह तीनों बहिष्कार करें तो भीस दो तिहाई बहुंत के लिए 330 सांसदों की जरूरत होगी। इनमें दो पार्टियों के सांसद वोटिंग सेदूर रहें और सभी निर्दलीय व जगनमोहन रेड्डी अगर सदन के अंदर साथ आएं तो भाजपा को संविधान संसोधन के लिए सिर्फ 2 सांसदों की जरूरत और रह जाएगी। शायद इसीलिए सपा पर भी भाजपा की नजर है, कांग्रेस के बाद सांसदों की संख्या अधिक है वहां तोड़फोड़ में दल बदल कानून की अड़चन आ सकती है। सपा के पास 36 सांसद हैं, यहां टीएमसी की तरह तोड़फोड़ की कोशिश हो सकती है जैसा कि एनडीए घटकदल के कुछ नेता दावा भी कर रहे हैं। हालांकि उप्र विधानसभा चुनाव से पहले यह संभव नहीं दिखता, सपा में तोड़फोड़ के लिए उसे पहले प्रदेश में पश्चिम बंगाल की तरह करारी मात देनी होगी। अगर सपा प्रदेश में लड़ने लायक बनी रहती तो उसके सांसद तोड़ना आसान नहीं होगा और कम से कम मानसून सत्र से पहले तो यह कतई संभव नहीं दिख रहा है।
अब बात करते हैं राज्यसभा की जहां भाजपा या कहें एनडीए को और अधिक तोड़फोड़ की जरूरत होगी। भाजपा लोकसभा में किसी तरह बिल पास भी करा लेती है तो राज्यसभा में यह काम बहुत मुश्किल होगा। 245 सीटों वाली राज्यसभा में 242 सीटें भरी हैं, दो तिहाई बहुंत के लिए यहां 161 का जादुई आकड़ा चाहिए। आप से साथ आए 7 सांसदों के बाद भी भाजपा के पास यहां 114 सासद हैं, उसके सहयोगियों को मिला लें तो 140 का आकड़ा पहुंचता है जो बहुंत से 21 कम है। राज्यसभा में यह आकड़ा भाजपा के लिए लगभग नामुमकिन लगता है।
