नई दिल्ली, न्यूज प्लस। अमेरिका ने एफ-22 रैप्टर, बी-1 और बी-2 बाम्बर से हमलों के बाद सी-ड्रोन से हमले कर ईरान को दहला दिया है। ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमले कर जवाब दिया। ईरान का साथ देने के लिए रूस इस युद्ध में कूद पड़ा है, तो दूसरी तरफ यमन भी युद्ध में शामिल हो गया है। ट्रंप ने 60 दिन में ईरान को नेस्तनाबूद करने का ऐलान कर दिया है, रूस और चाइना खुलकर ईरान के साथ आए तो विश्वयुद्ध-03 तय है। इसकी सुगबुगाहट भी शुरू हो गई है।
अमेरिका-ईरानके बीच युद्ध-02 अब परमाणु बम नहीं होर्मुज को लेकर शुरू हुआ है। युद्ध से पहले जिस होर्मुज से दुनिया भर के जहाज बेधड़क गुजरते थे वहां ईरान ने टोल वसूलना शुरू कर दिया। यह अमेरिका को नागवार लगा और ट्रंप ने होर्मुज में किसी भी दखल को नामंजूर कर दिया। पहले तो उन्होंने ईरान की टोल वसूली को गलत बताया लेकिन फिर उन्होंने यहां सुरक्षा देने के बदले खुद 20 फीसदी टैरिफ वसूलने की घोषणा कर दी। इसी के साथ अमेरिका ने ईरानी जहाजों की आवाजाही रोक दी, इसी रास्ते ईरान से चीन का तेल जाता है। चीन में ईरान से 30 फीसदी तेल की आपूर्ति होती है, जाहिर है इससे चीन भी बौखलाया हुआ है।
दोबारा शुरू हुए भीषण युद्ध के बीच तेजी से बदले घटनाक्रम में ईरान की राजधानी तेहरान में रूसी प्रलय यानी डूम्सडे प्लेन उतरा। रूसी राष्ट्रपति कार्यालय से जुड़े इस विशेष विमान में रूस के पावर मिनिस्टर सवार थे। एक दिन विमान यहां रुकने के बाद वह चीन रवाना हो गया। दरअसल पहले माना जा रहा था कि रूस ने ईरान की मदद के लिए यह विमान भेजा है लेकिन बाद में पता चला कि विमान में वहां से मंत्री सवार थे, जाहिर है युद्ध को लेकर रूस और चीन ईरान के साथ आ रहे हैं। दोनों देश खुलकर ईरान के साथ आए तो यह युद्ध महायुद्ध में बदलने में देर नहीं लगेगी।
