लखनऊ, न्यूज प्लस। श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी करने वालों के पूरे खुलासे के लिए रामभक्तों को अभी 15 दिन और इंतजार करना होगा। मुख्यमंत्री ने चढ़ावा चेरी की जांच कर रही स्पेशनल इनवेस्टीगेशन टीम (SIT) के अनुरोध पर जांच का समय के लिए 15 दिन का समय और बढ़ा दिया है। माना जा रहा है की SIT की जांच अब सिर्फ चढ़ावा चोरी तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि मंदिर निर्माण के लिए खरीदी गई जमीन में करोड़ों के घालमेल की भी जांच करेगी। जबकि विपक्ष का आरोप है कि यह सब चढ़ावा चोरी में शामिल बड़ी मछलियों को बचाने के लिए किया जा रहा है।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही SIT को एक-दो दिन में फाइनल जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपनी थी। पूरे देश को इस जांच रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार था, लोग जानना चाहते हैं कि चढ़ावा चोरी में और कौन शामिल है, और कौन बड़े लोग हैं जिनको चढ़ावा चोरी का हिस्सा मिलता था। खुद मुख्यमंत्री ने SIT गठन के बाद अपनी कई सभाओं में कहा था कि जांच के बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा, उन्होंने इसके लिए देश को सिर्फ 15 इंतजार करने को कहा था। अब सूत्रों से खबर मिल रहा है कि SIT ने जांच के लिए 15 दिन का और समय मांगा जिस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अतिरिक्त समय दे दिया है। अब एसआईटी 15 जुलाई तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपेगी।
सूत्रों के अनुसार, जांच का दायरा बढ़ने और मामले के सभी संवेदनशील पहलुओं की गहराई से पड़ताल करने के लिए एसआईटी को समय विस्तार दिया गया है। जांच एजेंसी पहले ही अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप चुकी है। मामले में अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है, जिनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। एसआईटी की जांच में अब तक सामने आया है कि मंदिर के चढ़ावे की रकम कथित तौर पर कई चरणों में निकाली गई और उसे अलग-अलग स्थानों पर निवेश किया गया। जांच एजेंसी इस पूरे मामले की मनी ट्रेल, बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की बारीकी से जांच कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान मनी ट्रेल को सात बैंकों तक ट्रेस किया गया है। इसके लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक समेत संबंधित बैंकों से पिछले पांच वर्षों के लेनदेन का रिकॉर्ड भी मांगा गया है। SIT यह सुनिश्चित करना चाहती है कि जांच के दौरान कोई भी तकनीकी, फोरेंसिक या दस्तावेजी साक्ष्य छूटने न पाए।
हालांकि अब विपक्ष की तरफ से आरोप लगाए जा रहे हैं कि जांच के लिए समय बढ़ाने का मतलब है मामले में लीपापोती की तैयारी शुरू हो गई है। विपक्ष का सीधा आरोप है कि बड़ी मछलियों को बचाने के लिए SIT को और समय दिया गया है, ताकि लोग धीरे-धीरे चढ़ावा चोरी को भूलने लगें और सरकार को मामला ठंडे बस्ते में डालने का मौका मिल जाए।
