अयोध्या, न्यूज प्लस। श्रीराम मंदिर का चढ़ावा लुट रहा था, तमाम जिम्मेदार और कर्ताधर्ता सामने देख रहे थे। चढ़ावा गिनती और उसकी व्यवस्था में जानबूझकर ऐसे लोगों को लगाया गया था जो पहले से दागी थे और सबके सामने खुलेआम लूटपाट कर रहे थे। चढ़ावा गणना का इंचार्ज बर्खास्त बैंक कर्मी सुभाष श्रीवास्तव को बनाया गया था, उसी की जिम्मेदारी बैंक में चढ़ावे का पैसा जमा करने की जिम्मेदारी थी। गणना इंचार्ज ही वास्तव में वह चढ़ावा चोरों का सरगना था।
सुभाष श्रीवास्तव स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में था और गबन के आरोप में बर्खास्त हुआ था, हालांकि बाद में कोर्ट के आदेश पर बहाल हुआ था। वह दागी था फिर भी बैंक से रिटायर होने के बाद उसे श्रीराम मंदिर जैसे पवित्र स्थान पर प्रवेश पा गया और यहां का सबसे महत्वपूर्ण काम में रख लिया गया। उसे चढ़ावा गणना का इंचार्ज किसने बनाया, ऐसी जिम्मेदारी एक दागी व्यक्ति को किसने दी जाहिर है इससे बड़े और जिम्मेदार लोगों पर शंका होना लाजिमी है। चंपत राय के एसआईटी को लिखे पत्र के बाद अनिल मिश्रा को सीधे तौर पर दोषी दिख रहे हैं लेकिन क्या चंपत राय सब नहीं देख रहे थे जिनका खास चेला टीनू यादव इस चोर गिरोह का सबसे सक्रिय सदस्य था।
चढ़ावा चोरी मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, सुप्रीम को कोर्ट केंद्र और उप्र सरकार के साथ एसआईटी और ट्रस्ट तक को नोटिस जारी की है। सरकारों से पूछा है सीबीआई जांच क्यों नहीं होनी चाहिए, एसआईटी से जांच और कार्रवाई का स्टेट पूछा है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को जिस गंभीरता से लिया है उससे लगता है अब बड़े भी जांच के दायरे में आएंगे और एक दिन बड़े भी जेल जा सकते हैं।
