महाराजगंज, न्यूज प्लस। महराजगंज के चौक बाजार क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक रामग्राम स्तूप (कन्हैया बाबा स्थल) के वैज्ञानिक उत्खनन का मार्ग अब प्रशस्त हो गया है। सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के अंतर्गत स्थित इस महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल के वृहद वैज्ञानिक उत्खनन के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। एएसआई मुख्यालय के अधीक्षण पुरातत्वविद, लखनऊ मंडल को आवश्यक कार्रवाई आगे बढ़ाने की सहमति दिए जाने के बाद अब बाकी औपचारिकताएं पूरी होते ही उत्खनन का काम शुरू हो जाएगा।
यह निर्णय महराजगंज के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। लंबे समय से इतिहासकारों, पुरातत्व विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों द्वारा इस स्थल के वैज्ञानिक अध्ययन और उत्खनन की मांग की जा रही थी। जनश्रुतियों और अनेक शोधकर्ताओं के अनुसार कन्हैया बाबा स्थल ही प्राचीन बौद्धकालीन रामग्राम स्तूप है, जिसका उल्लेख बौद्ध साहित्य और ऐतिहासिक स्रोतों में मिलता है। यदि वैज्ञानिक उत्खनन के दौरान इसके प्रमाण मिलते हैं, तो यह स्थल राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विशेष महत्व प्राप्त कर सकता है।
वर्ष 2024 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इस स्थल पर ट्रायल ट्रेंच के माध्यम से प्रारंभिक वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया था। उस सर्वेक्षण में प्राप्त संकेतों और उपलब्ध तथ्यों को देखते हुए अब व्यापक स्तर पर वैज्ञानिक उत्खनन की सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई है। पुरातत्वविदों का मानना है कि व्यवस्थित उत्खनन से इस स्थल से जुड़े अनेक ऐतिहासिक तथ्य, संरचनाएं और पुरावशेष सामने आ सकते हैं, जो बौद्धकालीन इतिहास के अध्ययन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि उन्होंने इस विषय को लगातार संसद, संस्कृति मंत्रालय तथा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष उठाया। उन्होंने कहा कि महराजगंज की इस अमूल्य ऐतिहासिक धरोहर को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से लगातार प्रयास किए गए, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आए हैं। उनके अनुसार एएसआई द्वारा वृहद उत्खनन के लिए सैद्धांतिक सहमति मिलना जिले के लिए बड़ी उपलब्धि है।
पंकज चौधरी ने कहा कि रामग्राम स्तूप केवल महराजगंज ही नहीं, बल्कि पूरे देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वैज्ञानिक उत्खनन से इस स्थल की वास्तविक ऐतिहासिक पहचान और महत्व दुनिया के सामने आएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि उत्खनन के बाद यदि यहां महत्वपूर्ण पुरातात्विक साक्ष्य प्राप्त होते हैं, तो महराजगंज को वैश्विक बौद्ध पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि इस परियोजना से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति मिलेगी। साथ ही देश-विदेश से आने वाले शोधकर्ताओं, बौद्ध अनुयायियों और पर्यटकों की संख्या बढ़ने की भी संभावना है। इससे महराजगंज की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पर्यटन संबंधी पहचान और अधिक मजबूत होगी।
अब सभी की निगाहें एएसआई द्वारा आगे की प्रशासनिक एवं तकनीकी औपचारिकताओं पर टिकी हैं। इनके पूरा होते ही रामग्राम (कन्हैया बाबा स्थल) पर वैज्ञानिक उत्खनन का कार्य शुरू होगा, जिससे इस प्राचीन धरोहर से जुड़े कई अनछुए ऐतिहासिक रहस्यों से पर्दा उठने की उम्मीद है।
