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किसके लिए ‘आपदा में अवसर’ साबित होगा चढ़ावा चोरी

किसके लिए ‘आपदा में अवसर’ साबित होगा चढ़ावा चोरी

लखनऊ, न्यूज प्लस। राममंदिर चढ़ावा चोरी क्या उप्र चुनाव में किसी के लिए ‘आपदा में अवसर’ साबित होगा, क्या इस मुद्दे का असर 2027 के चुनावों पर पड़ेगा। राजनीतिक विश्लेषक इसकी समीक्षा करने लगे हैं, कुछ का मानना है कि चनावों पर इसका असर न के बराबर होगा तो कुछ मानते हैं कि अखिलेश यादव नहीं बल्कि उल्टे सीएम योगी इस मुद्दे पर बड़े योद्धा बनकर उभरे हैं और उन्होंने ‘आपदा में अवसर’ खोज लिया है। 

निश्चित रूप से राममंदिर से चढ़ावा चोरी बड़ा और गंभीर मुद्दा है। विपक्ष खासकर अखिलेश यादव शुरू से ही इस मामले में सरकार, भाजपा और संघ पर हमलावर हैं, वास्तव में उन्होंने ही इसका खुलासा किया तब आम जनता को पता चला। इसके बाद जितना अखिलेश यादव हमलावर होते गए, सीएम योगी उससे एक कदम आगे बढ़कर जनता का विश्वास जीतने की कोशिश में लग गए। माना जा रहा था कि योगी और भाजपा के लिए यह बड़ी आपदा है लेकिन शायद योगी ने इसमें भी अवसर खोज लिया है। उन्होंने न केवल चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर ताबड़तोड़ एक्शन लिया बल्कि कृष्णजन्म भूमि जैसे दूसरे मुद्दे पर विपक्ष और खासकर अखिलेश यादव को घेरा। 

इस मुद्दे पर न तो संघ की तरफ से कोई आगे आया और न भाजपा की तरफ से अकेले सीएम योगी आगे आए और योद्धा बनकर उभरे, राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि अगर अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर ज्यादा अग्रेसन दिखाया तो उनके लिए यह मुद्दा बैक फायर भी साबित हो सकता है। हां विश्लेषक यह जरूर मानते हैं कि अगर सरकार और पुलिस की तरफ से कोई लीपापोती हुई तो भाजपा को इसका बड़ा नुकसान हो सकता है। जैसा की सीएम योगी ने एसआईटी गठन के बाद कहा था कि जल्द दूध का दूध-पानी का पानी होगा तो आम जनता को यह दिखना भी चाहिए और जांच व कार्रवाई में यह नहीं दिखा तो भाजपा को चुनाव में इसका खामियाजा भुगतना जरूर पड़ेगा।

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