नई दिल्ली, न्यूज प्लस। सरकार ने पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाकर बिना देश की जनता को बताए ई-20 लॉच कर दिया है। अप्रैल से गाड़ियों में ई-20 पेट्रोल डाला जा रहा है लेकिन पता तब चला जब गाड़ियां खराब होने लगीं और मैकेनिक के पास गईं। सरकार का दावा है कि किसी भी गाड़ी में कोई खराबी नहीं आयी है, हालांकि सरकार यह नहीं बता रही है कि इससे माइलेज घट गया है। जाहिर इथेनॉल मिलाने से पेट्रोल की कीमत घट गई है लेकिन इसका फायदा आम जनता को नहीं मिला, बल्कि माइलेज घटने से उसका नुकसान जरूर जनता को हो रहा है।
सरकार ने चुपके से अप्रैल में ई-20 पेट्रोल बेचना शुरू कर दिया लेकिन इसे खरीदने वालों ने नहीं बताया गया। करीब दो माह बाद लोगों को इसके बारे में पता चला। इस बीच मिडिल ईस्ट में युद्ध का बहाना कर सरकार ने पट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा दिए लेकिन यह नहीं बताया कि 20 फीसदी इथेनॉल मिलाने से पेट्रोल की लागत तो कम हो गई है।
दरअसल पेट्रोल की कीमत करीब 100 रुपये प्रति लीटर है, जबकि इथेनॉल की लागत करीब 60 रुपये प्रति लीटर आ रही है। 20 फीसदी इथेनॉल मिलाने से पेट्रोल की कीमत करीब 10 रुपये लीटर कम हो गई लेकिन इसका लाभ न तो आम जनता को दिया गया और न ही किसानों को जैसा कि सरकार कह रही है। सरकार ने अनुसार इथेनॉल प्रयोग से पर्यावरण बेहतर होगा, विदेशी मुद्रा बचेगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी।
सरकार की सारी बातें ठीक हैं तो भी ई-20 पेट्रोल लाने से पहले गाड़ियों की डिजाइन इसके अनुसार बनाने की जरूरत थी। इसके बाद अगर सरकार विदेशी मुद्रा बच रही है और पेट्रोल सस्ता हुआ है तो इसका फायदा जनता को क्यों नहीं दिया गया। किसानों को भी अभी तक इसका कोई लाभ नहीं दिया गया है। जाहिर है सरकार ने इस मामले में पारदर्शिता नहीं बरती और न ही जनता तो इसका फायदा हुआ जबकि उसे इससे नुकसान ही हुआ है। इसीलिए विपक्ष को सरकार पर हमले का मौका मिला है।
