समाजवादी पार्टी में लंबे समय तक आजम खान मुस्लिम राजनीति के सबसे बड़े नेताओं में गिने जाते रहे। रामपुर से लेकर पूरे उत्तर प्रदेश तक उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी। लेकिन कानूनी मामलों और लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से दूर रहने के बाद पार्टी के सामने नेतृत्व का नया सवाल खड़ा हो गया। 2022 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी कई मुस्लिम बहुल इलाकों में अखिलेश यादव को खुद ज्यादा सक्रिय भूमिका निभानी पड़ी। ऐसे में पार्टी के भीतर लगातार ऐसे चेहरे की तलाश की चर्चा होती रही, जो नई पीढ़ी से जुड़ सके और संगठन को नई दिशा दे सके।
तेजी से बढ़ा इकरा हसन का कद
इसी बीच कैराना से सांसद इकरा हसन का राजनीतिक कद लगातार बढ़ता दिखाई दिया। संसद में उन्होंने कई मुद्दों पर अपनी बात रखी, जिसकी चर्चा सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक हलकों तक हुई। उनका शांत और संतुलित अंदाज उनकी सबसे बड़ी ताकत माना जाता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इकरा हसन सिर्फ अपने संसदीय क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आने वाले समय में प्रदेश स्तर की बड़ी नेता बन सकती हैं। यही वजह है कि समाजवादी पार्टी के भविष्य को लेकर होने वाली चर्चाओं में उनका नाम लगातार सामने आ रहा है।
मिशन-2027 में मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
लोकसभा चुनाव के बाद इकरा हसन की सक्रियता उत्तर प्रदेश से बाहर भी देखने को मिली। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी उन्होंने इंडिया गठबंधन के लिए कई सीटों पर प्रचार किया। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी वह लगातार लोगों के बीच पहुंच रही हैं। राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि कैराना, शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, अमरोहा, मुरादाबाद और रामपुर जैसे जिलों में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। इन इलाकों में मुस्लिम मतदाता अहम भूमिका निभाते हैं और समाजवादी पार्टी अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
क्या बदल जाएगा सियासी समीकरण?
हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इकरा हसन भविष्य में आजम खान जैसी राजनीतिक पहचान बना पाएंगी या नहीं। आजम खान का राजनीतिक सफर कई दशकों में तैयार हुआ था। लेकिन इतना जरूर है कि समाजवादी पार्टी नई पीढ़ी के नेताओं को आगे बढ़ाने के संकेत दे रही है। दूसरी ओर बीजेपी भी मुस्लिम समाज, खासकर महिलाओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में मिशन-2027 से पहले इकरा हसन की भूमिका कितनी बड़ी होगी, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। फिलहाल उनका बढ़ता राजनीतिक कद उत्तर प्रदेश की सियासत में नई चर्चा जरूर छेड़ रहा है।
