लखनऊ, न्यूज प्लस। श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय क्या सरकारी गवाह बनकर साफ बच जाएंगे। क्या वह सरकारी गवाह बनकर अपने लोगों के खिलाफ गवाही देंगे और बच निकलेंगे। चंपत राय बंसल क्या सरकारी गवाह बनकर चढ़ावा चोरी के आरोपों से ‘चंपत’ होने वाले हैं।
चढ़ावा चोरी की जांच कर रही सरकारी एसआईटी एक माह में भी जांच पूरी नहीं कर पायी और अब उसने 15 दिन का समय और मांगा है। सरकार की ओर से समय भी दे दिया गया है लेकिन एसआईटी की जो अंतरिम जांच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई उससे लगता है सुप्रीम कोर्ट संतुष्ट नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर की जांच कर रही पुलिस पर भी शायद सुप्रीम कोर्ट को भरोसा नहीं है इसलिए विवेचना के लिए अलग एसआईटी बनाने का आदेश दिया है, इस एसआईटी में तीन आईपीएस अफसरों को शामिल करने का निर्देश दिया है।
इस बीच पुलिस को साक्ष्य मजबूत करने के लिए ऐसे सरकारी गवाह की जरूरत है जो इस मामले में शामिल रहा हो। पुलिस को इसके लिए चंपत राय को सबसे अहम मानती है, दरअसल पुलिस के पास इतने साक्ष्य हैं कि वह चंपत राय को आरोपी बना सकती है और चंपत राय जेल से बचने के लिए सरकारी गवाह बन सकते हैं। पुलिस भी यही चाहती है कि चंपत राय सरकारी गवाह बन जाएं ताकि उसका केस मजबूत हो। चंपत राय पहले ही एसआईटी पत्र लिखकर बता चुके हैं कि चढ़ावा गिनती की सारी व्यवस्थाओं के लिए अनिल मिश्रा जिम्मेदार हैं, उन्होंने ही बैंक से गिनती की व्यवस्था के लिए करार किया था। जाहिर है उन्होंने सारा दोष अनिल मिश्रा पर मढ़ने की कोशिश की है और इससे पुलिस को लग रहा है कि चंपत राय को सरकारी गवाह बनाना आसान होगा। पुलिस ने जेल भेजने का डर दिखाकर उनको सरकारी गवाह बनाने की कोशिश शुरू कर दी है और माना जा रहा है कि चंपत राय पुलिस के इस ऑफर को मानने में ज्यादा समय नहीं लगाएं।
