नई दिल्ली, न्यूज प्लस। केंद्र सरकार ने सीजेपी से सारे मुकदमे वापस लेने का वायदा तो कर दिया लेकिन क्या ये मुकदमे वापस लेना आसान होगा। वायदा सरकार ने कर दिया लेकिन मुकदमे वापस करने पर फैसला तो कोर्ट को करवा है। जहां पुलिस पर हमला हुआ, पुलिस वालों को चोटें आयी हैं और उनकी मेडिकल रिपोर्ट दाखिल की गई हैं उन मामलों में सरकार क्या करेगी और कैसे अदालत को कन्वेंस करेगी।
दिल्ली में पुलिस की ओर से करीब 20 मुकदमे दर्ज कराए गए हैं, 100 से ज्यादा पुलिस वालों के घायल होने का दावा किया गया है जिसका जिक्र सभी एफआईआर में है। सरकार जब अदालत में जनहित में मुकदमे वापसी के लिए कहेगी तो उसे समझाना भी होगा कि यह जनहित कैसे है। अदालत का सवाल हो सता है कि सड़कों पर जो खून बहा है उसका क्या होगा जिसके साक्ष्य खुद सरकार की ओर से दिए गए हैं। इसी तरह बिहार में 200 से ज्यादा मुकदमे हुए हैं, असम, बिहार, एमपी में भी कई-कई कदमे जेनजी के आंदोलन को लेकर किए गए हैं। बिहार और असम सरकार ने मुकदमे वापसी के लिए नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है, लेकिन अदालत में नोटिफिकेशन का जवाब देना होगा।
बिहार के की शहरों में जमकर हिंसा हुई है, छात्रों की तरफ से पथराव हुआ तो पुलिस ने भी खूब बरबरता की है। नौबत एके-47 से फायरिंग तक की आ गई, हालांकि इस मामले में भी पुलिस अधिकारियों ने झूठ बोला। बताया कि जिस पुलिस वाले ने एके-47 से फायरिंग की वह दरअसल एक अन्य मामले की जांच में जा रहा था। छात्रों ने पुलिस टीम को घेरकर हमला किया तो मजबूरी में हवा में फायरिंग करनी पड़ी, हालांकि वह भूल गए कि फायरिंग करता दिख रहे सिपाही ने बॉडी प्रोटेक्टर और हेलमेट पहन रखा और युवाओं पर सीधा फायरिंग कर रहा था। अब इसका जवाब बिहार सरकार के पास भी नहीं है कि क्या किसी जांच में जा रहे पुलिस वाले क्या एके-47 लेकर निकलते हैं और बॉडी प्रोटेक्टर व हेलमेट पहन कर निकलते हैं।
बिहार के मामले में भी अदालत को कन्वेंस कर पाना सरकार के लिए मुश्किल होगा। अगर अदालतें मुकदमे वापसी के लिए तैयार नहीं होतीं तो सरकार का वायदा कैसे पूरा होगा। ऐसे स्थिति में क्या जेन जी एक बार फिर जंतर-मंतर का रुख कर सकते हैं जैसी कि सीजेपी की तरफ से घोषणा की गई है। इसके अलावा जेनजी की मांग हिंसा और बरबरता के लिए दोषी पुलिस वालों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर कार्रवाई की भी मांग कर रहे हैं। उनकी यह मांग पूरी होती या वह कोर्ट के माध्यम से मुकदमे दर्ज कराते हैं तो सरकार और पुलिस के पास उनसे निपटने का कोई हथियार नहीं बचेगा क्योंकि मुकदमे वापसी के बाद फिर कैसे जेनजी को दोबारा दोषी ठहराएगी या कैसे बताएगी कि जेनजी की हिंसा को रोकने के लिए उसे यह कदम उठाने पड़े।
