नई दिल्ली, न्यूज प्लस। नीट पेपर लीक पर सदन से सड़क तक अभी भी शोर हो रहा है, लेकिन इसका जो सबसे दुखद पहलू है वह यह कि छात्रों की जिंदगी की कामत कोई नहीं समझ रहा है। महाराष्ट्र और गुजरात में दो और छात्रों ने क्षुब्ध होकर सुसाइड कर लिया, लेकिन इसकी चर्चा न सरकार कर रही है और न विपक्ष। इस तरह अब तक 23 छात्र आत्महत्या कर चुके हैं लेकिन इसके लिए न तो किसी ने जिम्मेदरी ली और न किसी पर क्रिमिल केस दर्ज हुआ।
महाराष्ट्र के अहिल्याबाई नगर की एक और छात्रा अंकिता ने रविवार रात फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली, उसने सुसाइड नोट में साफतौर पर पेपरलीक को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। अंकिता ने दोनों बार नीट का पेपर दिया था, उसके दूसरी बार पेपर में 166 अंक आए जो 177 अंकों के कटऑफ से मात्र 11 अंक कम थे। इसके कारण उसका सेलेक्शन नहीं हो पाया, अंकिता ने सुसाइड नोट में लिखा कि पहले उसका पेपर अच्छा हुआ लेकिन पेपर लीक से वह डिस्टर्ब हो गई और तनाव के कारण दूसरी बार पेपर उतना अच्छा नहीं हुआ। अंकिता के परिवार ने भी उसके सुसाइड से लिए सिस्टम को जिम्मेदार ठहराया है। उधर गुजरात के सूरत में 17 साल के NEET-UG के छात्र कहान पटेल ने आत्महत्या कर ली। परिजनों का कहना है कि वह परीक्षा से जुड़े तनाव और अनियमितताओं से परेशान था।
सरकार और विपक्ष की अपनी राजनीतिक लड़ाई में बच्चे बलि चढ़ रहे हैं। इन 23 बच्चों की मौत का जिम्मेदार कौन है अभी तक यह तय नहीं हो पाया है। भले शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया लेकिन इन आत्महत्याओं के लिए तो जिम्मेदारों पर क्रिमिनल केस चलने चाहिए, सरकार क्या यह जिम्मेदारी लेगी या किसी जिम्मेदार के खिलाफ क्रमिनल केस चलाएगी। सीजेपी ने भी इनके परिवारों को केवल मुआवजा देने की मांग कर किनारा कर लिया, उसने प्रधान के इस्तीफे पर जशन मना लिया पर क्या इन बच्चों को न्याय दिलाने के लिए लड़ाई लड़ेंगे। तमाम आदोंलन और हार-जीत के बीच यह बड़ा सवाल अभी भी कायम है।
