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सुरक्षा में चूक या कड़ी कार्रवाई से बचने का खामियाजा

सुरक्षा में चूक या कड़ी कार्रवाई से बचने का खामियाजा

नई दिल्ली, न्यूज प्लस। संसद के मानसून सत्र का पहला दिन, संसद भवन में मौजूद तमाम सांसद और पूरा केंद्रीय मंत्रिमंडल फिर भी सुरक्षा घेरा तोड़कर हजारों युवा संसद भवन के करीब तक पहुंच गए। प्रधानमंत्री और सांसदों को संसद भवन से निकालने के लिए पुलिस को कड़ी कवायद करनी पड़ी इसे क्या माना जाए यह सुरक्षा में चूक है या फिर जेनजी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई से बचने का खामियाजा। क्या सरकार मान रही थी कि जेनजी को कड़ाई से कुचला गया तो खराब संदेश जाएगा और आक्रोश और बढ़ेगा। 

काकरोच जनता पार्टी के आंदोलन और संसद मार्च की जानकारी पहले से सरकार और पुलिस सबको थी। इसके बावजूद हजारों युवा संसद भवन के करीब तक पहुंच गए जहां देश के तमाम सांसद, प्रधानमंत्री-गृहमंत्री समेत पूरा केंद्रीय मंत्रिमंडल मौजूद था। पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज किया और आसू गैस के गोले छोड़े लेकिन युवा देर शाम तक गोरिल्ला युद्ध जैसे बार-बार आते रहे और प्रदर्शन करते रहे। यह तब होता रहा जब दिल्ली पुलिस कमिश्नर खुद संसद भवन थाने में लगातार मौजूद रहे और पूरी स्थिति पर नजर बनाए रखी।

इस चूक पर केंद्र सरकार को निश्चित रूप से चिन्तित दिखी तभी शाम को गृहमंत्री अमित शाह को सुरक्षा के मद्देनजर बैठक बुलानी पड़ी। देर शाम उन्होंने केंद्रीय गृह सचिव और दिल्ली पुलिस कमिश्नर के साथ आईबी चीफ के साथ बैठक करके पूरे मामले की समीक्षा की। क्योंकि माना जा रहा है कि काकरेच जनता पार्टी का आंदोलन अभी जारी रहेगा और कल फिर संसद कूच का काल आ सकता है। अभी भी जंतर-मंतर पर हजारों की संख्या में जेन जी मौजूद हैं और ऐलान किया कि नेपाल की तरह आंदोलन खड़ा करेंगे।

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