नई दिल्ली, न्यूज प्लस। पर्चा लीक पर आंदोलन के दौरान जेन-जी के साथ 100 से अधिक पुलिस वाले भी घायल हुए हैं, इनमें से कई को गंभीर चोटें हैं। जाहिर ने घायल लड़के-लड़कियां किसी के बेटे-बेटियां हैं और इनके प्रति संवेदना है तो यह पुलिस वाले भी किसी के पिता और पति हैं। शुक्रवार को इन पुलिस वालों के परिवार मीडिया के सामने आए और सदन से न्याय मांगा। यही नहीं घायल पुलिस वालों के परिजन सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गए हैं, इसके बाद जेन-जी के मुकदमे वापसी में एक और पेंच फंस गया है।
सीजेपी से समझौते में केंद्रीय मंत्रियों ने भले जेन-जी के सारे मुकदमे वापस लेने का ऐलान किया लेकिन इसमें पेंच फंसते ही जा रहे हैं। सार्वजनिक रूप से मुकदने वापसी की घोषणा करते हुए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने यह नहीं बताया कि इसमें कितने पेंच हैं और सरकार चाहकर भी मुकदमे वापस नहीं ले सकती है। दरअसल मुकदमे वापसी का फैसला तो कोर्ट को करना है, भले सरकार मुकदमे वापसी की अपील करे लेकिन अंतिम मुहर कोर्ट की ही लगेगी और यह मुद्दा उलझता ही जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही कहा है कि दर्ज किए गए रे मुकदमो की स्वतंत्र विवेचना जारी रखें। अब तो मुकदमे वापसी का विरोध उन पुलिस वालों के परिजनों ने शुरू कर दिया है जो आदंलोन में घायल हुए हैं। उन्होंने सुप्रीमकोर्ट से मुकदमे वापसी के बजाय पुलिस पर हमला करने वालों के खिलाफ मुकदमे चलाने और सजा की अपील की है। इसके बाद किसी कीमत पर जेन-जी के मुकदमे वापस नहीं हो सकते हैं, जाहिर है सरकार भी कहेगी कि कोर्ट मुकदमे वापस नहीं ले रही तो वह क्या कर सकती है।
