ईरान और इजराइल के बीच जारी संघर्ष के बीच हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिका और इजराइल की ओर से किए जा रहे हमलों को लेकर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने कहा कि इन हमलों में सिर्फ सैन्य ठिकानों को ही निशाना नहीं बनाया जा रहा, बल्कि कई रिहायशी इलाकों और तेल से जुड़े ठिकानों को भी नुकसान पहुंच रहा है। उनका कहना है कि इससे आम लोगों के जीवन पर गंभीर असर पड़ रहा है।
नागरिक इलाकों को निशाना बनाने का आरोप
ईरान का आरोप है कि हमलों में ऑयल डिपो, रिफाइनरी और कई नागरिक इमारतें भी प्रभावित हुई हैं। कुछ जगहों पर स्कूलों और आवासीय भवनों को भी नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। सोशल मीडिया और स्थानीय रिपोर्टों में कई शहरों से आग की ऊंची लपटें और धुएं के बड़े गुबार दिखाई दे रहे हैं। इन तस्वीरों ने हालात की गंभीरता को और साफ कर दिया है।
पर्यावरण को नुकसान की भी चेतावनी
ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि इस तरह की बमबारी सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पर्यावरण पर भी पड़ रहा है। उन्होंने इसे पर्यावरण विनाश की स्थिति बताया। उनका कहना है कि तेल डिपो और रिफाइनरी पर हमलों से मिट्टी और भूजल के दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके कारण आने वाली कई पीढ़ियों को भी इसके नुकसान झेलने पड़ सकते हैं।
हमलों को युद्ध अपराध बताया
ईरान ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया है। विदेश मंत्री अरागची ने कहा कि ऐसे हमले युद्ध अपराध की श्रेणी में आते हैं और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उनका कहना है कि दुनिया को इस मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए और इस तरह की कार्रवाई को रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए।
अमेरिका का दावा, ईरान को भारी नुकसान
दूसरी ओर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि इन हमलों से ईरान की सैन्य ताकत को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि अगर अभी संघर्ष रुक भी जाए तो भी ईरान को अपनी ताकत दोबारा खड़ी करने में करीब दस साल लग सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अभी संघर्ष खत्म होने की घोषणा करना जल्दबाजी होगी।
खर्ग द्वीप पर हमले का भी जिक्र
ट्रंप ने यह भी बताया कि खर्ग द्वीप पर किए गए हमले में वहां के कई ठिकानों को नुकसान पहुंचा है। उनके अनुसार वहां केवल छोटा सा हिस्सा ही बचा है जहां से तेल पाइपलाइन गुजरती है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास आगे भी कार्रवाई करने की पूरी तैयारी है और जरूरत पड़ने पर तुरंत कदम उठाया जा सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।
