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मिडिल ईस्ट तनाव का असर: भारत के कई शहरों में LPG को लेकर बढ़ी चिंता

मिडिल ईस्ट तनाव का असर: भारत के कई शहरों में LPG को लेकर बढ़ी चिंता

मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध जैसे हालात का असर अब भारत के शहरों तक पहुंचने लगा है। इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। इसका सीधा असर एलपीजी गैस की सप्लाई और कीमतों को लेकर लोगों की चिंता के रूप में दिखाई दे रहा है। कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की भीड़ बढ़ गई है और सिलेंडर की बुकिंग में देरी की शिकायतें सामने आ रही हैं।

शहरों में सिलेंडर के लिए बढ़ी भीड़

लखनऊ, दिल्ली, चेन्नई, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई में देरी की खबरें सामने आई हैं। खासकर लखनऊ में पिछले दो दिनों से होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों को सिलेंडर मिलने में परेशानी हो रही है।

आमतौर पर घरेलू सिलेंडर बुकिंग के अगले दिन घर पहुंच जाता था, लेकिन अब कई जगह डिलीवरी में पांच से सात दिन तक का समय लग रहा है। इस स्थिति के कारण लोग गैस एजेंसियों पर पहुंचकर खुद सिलेंडर लेने लगे हैं।

होटल और रेस्टोरेंट व्यवसाय पर असर

कमर्शियल एलपीजी की किल्लत का असर सबसे ज्यादा होटल और रेस्टोरेंट उद्योग पर पड़ रहा है। होटल व्यवसाय से जुड़े संगठनों के मुताबिक, गैस सप्लाई में रुकावट के कारण कुछ शहरों में कई होटल और रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं।

मुंबई में होटल उद्योग से जुड़े संगठन “आहार” का कहना है कि गैस आपूर्ति प्रभावित होने से लगभग 20 प्रतिशत होटल अस्थायी रूप से बंद हो चुके हैं। वहीं जयपुर, पुणे और उदयपुर जैसे शहरों में भी कमर्शियल गैस की कमी से होटल और कैटरिंग व्यवसाय प्रभावित होने लगे हैं।

दक्षिण भारत के कुछ इलाकों में हालात और गंभीर बताए जा रहे हैं। पुडुचेरी में होटल मालिकों का कहना है कि यहां अधिकांश रेस्टोरेंट पूरी तरह एलपीजी पर निर्भर हैं और गैस सप्लाई रुकने से कई प्रतिष्ठान बंद होने के खतरे में हैं।

छोटे शहरों में अफवाह से बढ़ी बेचैनी

गैस की संभावित कमी की खबरों और अफवाहों ने छोटे शहरों में भी चिंता बढ़ा दी है। उत्तर प्रदेश के देवरिया, बाराबंकी और वाराणसी में गैस एजेंसियों पर अचानक भीड़ बढ़ गई। हरियाणा के चरखी दादरी और बिहार के सुपौल में भी सिलेंडर लेने के लिए लंबी कतारें देखी गईं।

झारखंड की राजधानी रांची में लोग सिलेंडर लेने के लिए खुद एजेंसियों तक पहुंच रहे हैं। हालांकि स्थानीय एजेंसी संचालकों का कहना है कि वास्तविक कमी नहीं है, बल्कि त्योहारों और छुट्टियों के कारण सप्लाई चेन कुछ समय के लिए प्रभावित हुई थी।

सरकार ने उठाए कई कदम

संभावित संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने एलपीजी की आपूर्ति को नियंत्रित रखने के लिए कई कदम उठाए हैं। सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए गैस की जमाखोरी रोकने और वितरण पर निगरानी बढ़ाने का फैसला किया है।

नई व्यवस्था के तहत अब घरेलू गैस सिलेंडर की अगली बुकिंग 25 दिनों के अंतराल के बाद ही की जा सकेगी। इसका उद्देश्य संकट के समय में अनावश्यक स्टॉक जमा करने की प्रवृत्ति को रोकना है।

इसके साथ ही तेल विपणन कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरत को प्राथमिकता दी जाए। उद्योगों और गैर-घरेलू क्षेत्रों के लिए गैस आपूर्ति की समीक्षा के लिए एक विशेष समिति भी बनाई गई है।

रिफाइनरियों में उत्पादन बढ़ाने की कोशिश

सरकार का कहना है कि देश में एलपीजी की आपूर्ति बनाए रखने के लिए रिफाइनरियों में उत्पादन बढ़ाया गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, एलपीजी उत्पादन में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है और रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं।

सरकार का दावा है कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस की कमी नहीं होने दी जाएगी और सीएनजी-पीएनजी की आपूर्ति भी सामान्य रखने की कोशिश की जा रही है।

अभी घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन सतर्कता जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा संकट का असर भारत जैसे बड़े आयातक देश पर पड़ना स्वाभाविक है। हालांकि फिलहाल सरकार स्थिति को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रही है और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए आपूर्ति बनाए रखने को प्राथमिकता दी जा रही है।

फिर भी मिडिल ईस्ट में हालात लंबे समय तक अस्थिर रहे तो इसका असर गैस की कीमतों और सप्लाई दोनों पर पड़ सकता है। फिलहाल प्रशासन लोगों से अफवाहों से बचने और जरूरत के अनुसार ही गैस बुक करने की अपील कर रहा है।

Ankit Awasthi

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