उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल के बीच अखिलेश यादव ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया। करीब आधे घंटे चली इस मुलाकात में राम मंदिर में कथित चढ़ावा गड़बड़ी, गोरक्षा और सनातन धर्म से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। मुलाकात के बाद दोनों की बातचीत को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई। माना जा रहा है कि चुनाव से पहले यह मुलाकात सपा की नई रणनीति का हिस्सा हो सकती है, जिसमें धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर भी सक्रियता दिखाई जा रही है।
राम मंदिर और गोरक्षा पर सरकार को घेरा
मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने राम मंदिर में कथित चढ़ावा गड़बड़ी के मामले को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं हो रही है और केवल औपचारिक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सनातन समाज की भावनाएं आहत हुई हैं और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही गोरक्षा के मुद्दे पर भी सरकार को घेरते हुए उन्होंने कहा कि गायों की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है और इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।
सॉफ्ट हिंदुत्व की रणनीति पर बढ़ी चर्चा
राजनीतिक जानकार इस मुलाकात को समाजवादी पार्टी की बदलती रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं। लंबे समय से बीजेपी सपा पर हिंदू विरोधी राजनीति का आरोप लगाती रही है। ऐसे में हाल के दिनों में अखिलेश यादव लगातार धार्मिक कार्यक्रमों, मंदिरों और संत समाज से जुड़ाव बढ़ाते नजर आए हैं। शंकराचार्य से मुलाकात को भी इसी राजनीतिक प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है। इससे पहले भी वह राम मंदिर और आस्था से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय खुलकर रखते रहे हैं।
2027 चुनाव से पहले तेज हुई सियासी तैयारी
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले सभी राजनीतिक दल अपने-अपने मुद्दों को मजबूत करने में जुटे हैं। एक ओर बीजेपी अपनी विकास और धार्मिक एजेंडे पर जोर दे रही है, वहीं समाजवादी पार्टी अब आस्था, सनातन और गोरक्षा जैसे विषयों पर भी सक्रिय नजर आ रही है। शंकराचार्य से मुलाकात के बाद इन मुद्दों पर सियासी बहस और तेज होने की संभावना है। आने वाले समय में जांच की दिशा, राजनीतिक बयानबाजी और जनता की प्रतिक्रिया तय करेगी कि यह मुद्दा चुनावी राजनीति में कितना असर छोड़ता है।
