अयोध्या, न्यूज प्लस। एसआईटी और श्रीराम जन्मभूमि न्यास दोनों ने चंपत राय बंसल को क्लीन चिट दे दी है। तो क्या करोड़ों रुपये चढ़ावा लूटने वाले सिर्फ जेल गए यहीं चिंदी चोर थे। जमीन खरीद में करोड़ों के हेरफेर में क्या कोई दोषी नहीं है, मंदिर निर्माण में 40 फीसदी कमीशन क्या सिर्फ कुछ लोगों ने खाया। एलएनटी ने जब सिर्फ एक रुपये में मंदिर निर्माण के लिए कहा था तो हजारों करोड़ रुपये किसने खर्च कर दिए।
न्यास की बैठक में सोमवार को चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया लेकिन कोषाध्यक्ष गोविन्ददेव गिरि ने जिस तरह चंपत राय को न केवल क्लीनचिट दी बल्कि उनका महिमामंडन किया इससे तो यही साबित होता है कि चंपत राय का दखल न्यास में वैसे ही बना रहेगा। एसआईटी की प्रारम्भिक रिपोर्ट में अनिल मिश्रा का जिक्र तो है लेकिन चंपत राय का एक बार भी नाम तक नहीं आया, यानी वह एकदम पाकसाफ हैं। एफआईआर के बाद पुलिस की विवेचना में भी अभी तक चतंत राय कहीं नहीं हैं, साफ है चंपत राय को सभी तरफ से एकदम पाकसाफ बताने की कोशिश हो रही है।
जहां बिना चंपत राय के इशारे के पत्ता तक नहीं हिल सकता था वहां इतना सब होता रहा फिर भी चंपत राय पाकसाफ हैं को ‘असली चंपत’ कौन है। ऐसा है तो फिर जिस जमीन की खरीद खुद चंपतराय ने की उसमें करोड़ों की हेरफेर किसने करल दी। श्रीराम मंदिर की निर्माण चंपतराय की देखरेख में हुआ तो 40 फीसदी कमीशन कौन खा गया। चढ़ावा चोरी की सारी व्यवस्था चंपत राच ने की, उनकी अनुमति से चढ़ावा गिनने वाले रखे गए तो फिर कैसे चढ़ावे में लूट हो गई और सीसीटीवी फुटेज तक साफ कर दिए गए। जमीन खरीद, निर्माण से लेकर चंदा और चढ़ावा लूट तक होता रहा और सबकुछ देखने वाले चंपत राय अगर एकदम पाकसाफ हैं तो न्यास के कोषाध्यक्ष को बताया चाहिए यह सब किया किसने। अगर चंपत राय पाकसाफ हैं तो पांच मई को चोरी पकड़ी गई और चंपत राय ने चोरी किए गए 80 लाख रुपये भी बरामद करा लिए तो फिर चोरों और लुटेरों को बचाने के लिए एफआईआर क्यों नहीं दर्ज कराई गई। इसके लिए कौन जिम्मेदार है अगर चंपत राय पाकसाफ थे तो तत्काल एफआईआर क्यों नहीं दर्ज दराई। अब देश भर से सवाल आ रहे हैं कि श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी का ‘असली चंपत’ क्या कभी सामने आ पाएगा या हर स्तर पर लीपापोती हो जाएगी।
