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UP में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना होगा और सख्त, पासपोर्ट की तर्ज पर पुलिस वेरिफिकेशन और ऑटोमैटिक टेस्ट की तैयारी

UP में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना होगा और सख्त, पासपोर्ट की तर्ज पर पुलिस वेरिफिकेशन और ऑटोमैटिक टेस्ट की तैयारी

उत्तर प्रदेश सरकार ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने जा रही है। नए सिस्टम के तहत ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग, डिजिटल टोकन, बायोमेट्रिक सत्यापन और तय प्रक्रिया के बाद ही लाइसेंस जारी होगा। परिवहन विभाग का उद्देश्य सिर्फ योग्य और ट्रैफिक नियमों की जानकारी रखने वाले लोगों को ही ड्राइविंग लाइसेंस देना है। इससे आरटीओ कार्यालयों में भीड़ कम होगी और दलालों की भूमिका भी सीमित होगी।

ऑटोमैटिक टेस्ट से होगा फैसला

नई व्यवस्था में मैन्युअल ड्राइविंग टेस्ट की जगह ऑटोमैटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक का इस्तेमाल किया जाएगा। कैमरे, सेंसर और कंप्यूटर सिस्टम यह तय करेंगे कि आवेदक पास हुआ या फेल। रिवर्स-एस, एट-शेप और चढ़ाई पर वाहन नियंत्रित करने जैसे टेस्ट होंगे। यदि वाहन पीली लाइन छूता है या सेंसर से टकराता है तो सिस्टम स्वतः फेल घोषित कर देगा। लगातार तीन बार फेल होने पर आवेदन रद्द हो जाएगा और छह महीने बाद ही दोबारा आवेदन किया जा सकेगा।

इन मामलों में होगा पुलिस वेरिफिकेशन

प्रस्ताव के अनुसार सभी आवेदकों के लिए पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य नहीं होगा। बस, ट्रक, टैक्सी और अन्य कमर्शियल वाहन चालकों के लिए चरित्र और आपराधिक रिकॉर्ड की जांच जरूरी होगी। वहीं सामान्य वाहन लाइसेंस के मामलों में केवल संदिग्ध परिस्थितियों, आधार डेटा में गड़बड़ी या गंभीर आपराधिक मामलों में पुलिस सत्यापन कराया जाएगा। आवेदन के दौरान ली गई लाइव फोटो और बायोमेट्रिक का आधार से मिलान भी किया जाएगा।

ट्रेनिंग करने वालों को मिलेगी राहत

सरकार ने मान्यता प्राप्त ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर से 28 दिन का प्रशिक्षण पूरा करने वाले लोगों को बड़ी राहत देने की तैयारी की है। ऐसे आवेदकों को फॉर्म-5 मिलने के बाद अलग से आरटीओ या ऑटोमैटिक ट्रैक पर ड्राइविंग टेस्ट नहीं देना होगा और उन्हें सीधे स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस जारी किया जा सकेगा। परिवहन विभाग का मानना है कि नई व्यवस्था से फर्जी लाइसेंस, सिफारिश और भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी, साथ ही सड़क सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।

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