बिहार, राजबीर सिंह। बिहार में पहले चरण की 121 सीटों के लिए प्रचार कुछ मिनटों में थमने वाला है, पहले दौर के प्रचार के दौरन जिस तरह जुबानी जंग हुई वह प्रदेश की जनता कभी नहीं भूलेगी। अब से 38 घंटे बाद जब मतदान शुरू होगा उस वक्त जनता के दिमाग में जुबानी जंग रहेगी य़ा वायदों की बौछार यह तो 14 नवंबर को मतगणना के बाद ही पता चलेगा लेकिन यह तय है कि नेताओं के विवादित बयान हमेशा जहन में रहेंगे।
एनडीए ने जंगलराज का एजेंडा सेट करने की कोशिश की थी जिसे पीएम मोदी ने कट्टा-छर्रा और दोनाली तक पहुंचा दिया। मोकामा में दुलारचंद की हत्या हुई तो इसका जवाब तेजस्वी ने महाजंगलराज से दिय़ा। दोनों तरफ से यह एजेंडा पूरे प्रचार में हावी रहा और चुनाव में कूदे महाबलियों का भी जिक्र हुआ। इस बीच उप्र के सीएम योगी की इंट्री हुई को पहले विकास बनाम बुर्का आया और फिर उन्होंने महागठबंधन को टप्पू, पप्पू और अप्पू तीन बंदरों का गठबंधन बता व्यक्तिगत हमला बोला। इसका जवाब अखिलेश यादव ने दिया, उन्होंने कहा भाजपा गप्पू और चप्पू की पार्टी है। सीमांचल में मुस्लिम वोटों के लिए घमासान जुबान काटने और आंखें निकालने तक पहुंच गया। इसके बाद एनडीए खासकर भाजपा को आरजेडी प्रत्याशी और भोजपुरी स्टार खेसारीलाल के मंदिर-अस्पताल के बयान पर मौका मिल गया। खेसारी ने कहा राममंदिर बनना चाहिए लेकिन क्या इससे लोगों को रोजगार और इलाज मिल जाएगा। उन्होंने कहाकि मंदिर से रोजगार और इलाज मिले तो बिहार में 200 मंदिर बनवा दें, उन्होंने मंदिर की जगह अस्पताल-रोजगार की पैरवी की तो उन पर हमला शुरू हो गया। भाजपा नेताओं ने कहा खेसारी राम और राममंदिर विरोधी हैं। इन बयानों का बिहार की जनता पर असर होगा, जनता वोट डालते समय दोनों तरफ से किए गए वायदों को याद रखेगी या फिर पुराने ट्रेंड पर बिहार की जनता जातिवाद पर वोट करेगी यह देखना रोचक होगा।



