हिंदू मान्यताओं के अनुसार खरमास को अशुभ समय माना जाता है, जिसमें शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। यह अवधि तब लगती है जब सूर्य देव मीन या धनु राशि में रहते हैं। इस बार सूर्य के मीन राशि में होने के कारण पिछले एक महीने से विवाह जैसे कार्य रुके हुए थे, लेकिन अब यह इंतजार खत्म होने वाला है।
मेष राशि में प्रवेश का समय
14 अप्रैल को सुबह 09 बजकर 38 मिनट पर सूर्य देव मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। इस क्षण के साथ ही खरमास समाप्त हो जाएगा। इसी दिन बैसाखी और मेष संक्रांति का पर्व भी मनाया जाएगा। इस बदलाव के बाद शुभ कार्यों का सिलसिला फिर से शुरू हो जाएगा।
15 अप्रैल से शुरू होंगे विवाह
खरमास समाप्त होने के बाद 15 अप्रैल से विवाह, सगाई, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे मांगलिक कार्य दोबारा शुरू हो जाएंगे। लंबे समय से रुके शादी के कार्यक्रम अब पूरे जोश के साथ आयोजित किए जाएंगे। ज्योतिष के अनुसार यह समय विवाह के लिए बेहद शुभ माना जाता है।
अप्रैल से जुलाई तक मुहूर्त
अगर मुहूर्त की बात करें तो अप्रैल से जुलाई तक कुल 28 शुभ विवाह मुहूर्त उपलब्ध हैं। अप्रैल में 8, मई में 8, जून में 8 और जुलाई में 4 मुहूर्त बताए गए हैं। इसका मतलब है कि आने वाले तीन महीनों में शादी का सीजन अपने चरम पर रहेगा और बड़ी संख्या में शादियां देखने को मिलेंगी।
चातुर्मास में फिर लगेगा ब्रेक
हालांकि यह शुभ समय ज्यादा लंबा नहीं रहेगा। 25 जुलाई से चातुर्मास शुरू हो जाएगा, जो 21 नवंबर तक चलेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान भगवान विष्णु विश्राम करते हैं, इसलिए इस समय विवाह जैसे मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है।
शादी की तैयारी के लिए सही समय
ज्योतिष के जानकारों के अनुसार अप्रैल से जुलाई का समय विवाह के लिए सबसे उपयुक्त माना जा रहा है। इस दौरान ग्रहों की स्थिति अनुकूल रहती है, जिससे वैवाहिक जीवन सुखमय रहने की संभावना बढ़ती है। यही वजह है कि इस अवधि में शादी की मांग और तैयारियां दोनों तेजी से बढ़ जाती हैं।
समय का सही उपयोग जरूरी
अब जब शुभ मुहूर्त शुरू हो रहे हैं, तो जो लोग शादी की योजना बना रहे हैं, उनके लिए यह सही समय है। क्योंकि चातुर्मास के बाद फिर लंबे समय तक इंतजार करना पड़ सकता है। ऐसे में समय रहते सही मुहूर्त का चयन करना जरूरी माना जाता है।
