केरल के वायनाड में भारी बारिश के बीच पहाड़ का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आ गया। इस हादसे में 3 लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए। राहत और बचाव का काम तुरंत शुरू किया गया। हादसे के बाद राज्य के कृषि मंत्री ने कहा कि यह सिर्फ प्राकृतिक हादसा नहीं, बल्कि इंसानी गलती का नतीजा भी हो सकता है। हालांकि प्रशासन ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है और जांच जारी है।
टनल प्रोजेक्ट पर क्यों उठे सवाल?
हादसे के बाद 2,134 करोड़ रुपये की टनल परियोजना चर्चा में आ गई। मंत्री का आरोप है कि सुरंग बनाने के दौरान निकली मिट्टी और मलबा सही तरीके से नहीं हटाया गया। उनका कहना है कि लगातार बारिश के बाद यही मलबा खिसक गया और हादसा हो गया। हालांकि अभी जांच पूरी नहीं हुई है, इसलिए अंतिम फैसला आना बाकी है।
क्या है यह टनल परियोजना?
यह टनल कोझिकोड और वायनाड के बीच सफर आसान बनाने के लिए बनाई जा रही है। करीब 8.7 किलोमीटर लंबी इस सुरंग के बनने से दोनों शहरों के बीच दूरी काफी कम हो जाएगी और लोगों का सफर भी पहले से आसान होगा। सरकार का कहना है कि इससे पहाड़ी सड़क पर निर्भरता भी कम होगी।
वायनाड में बार-बार क्यों टूटते हैं पहाड़?
वायनाड पहाड़ों वाला इलाका है, जहां हर साल बहुत ज्यादा बारिश होती है। लगातार बारिश से मिट्टी कमजोर हो जाती है और पहाड़ खिसकने लगते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, वायनाड का बड़ा हिस्सा ऐसे ढलानों पर है जहां भूस्खलन का खतरा हमेशा बना रहता है। इसलिए यहां हर मानसून में ऐसे हादसों का डर रहता है।
पर्यावरण विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी इलाकों में बड़े निर्माण कार्य सोच-समझकर होने चाहिए। उनका मानना है कि ज्यादा खुदाई और निर्माण से पहाड़ कमजोर हो सकते हैं। इसी वजह से इस टनल परियोजना का शुरू से विरोध भी होता रहा है। हालांकि सरकार का कहना है कि सभी जरूरी नियमों का पालन किया जा रहा है।
अभी जांच पूरी होना बाकी
फिलहाल यह साफ नहीं है कि हादसे की असली वजह सिर्फ भारी बारिश थी या टनल का काम भी जिम्मेदार है। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता राहत और बचाव का काम है, ताकि प्रभावित लोगों की जल्द से जल्द मदद की जा सके।
