बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मियों के बीच राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता और विपक्ष के सूबेदार तेजस्वी प्रसाद यादव ने एक बार फिर विपक्षी महागठबंधन की ओर से जनता को लुभाने वाला बड़ा दांव खेला है।
पटना के पोलो रोड स्थित अपने आवास पर शनिवार को आयोजित प्रेस वार्ता में तेजस्वी ने घोषणा की कि यदि महागठबंधन की सरकार सत्ता में आती है, तो राज्य की करीब 10 लाख जीविका दीदियों को न केवल सरकारी कर्मचारी का स्थायी दर्जा दिया जाएगा, बल्कि उनके मौजूदा लोनों पर ब्याज माफ कर दिया जाएगा। ऊपर से, अगले दो वर्षों तक उन्हें बिना किसी ब्याज के नया ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। इस ऐलान के साथ ही तेजस्वी ने जोर देकर कहा, "मुझे सिर्फ 20 महीने चाहिए। हम हर परिवार में एक सरकारी नौकरी सुनिश्चित करेंगे।" यह वादा न केवल महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक कदम है, बल्कि बेरोजगारी और आर्थिक बोझ से जूझ रही बिहार की जनता के लिए एक उम्मीद की किरण भी।
तेजस्वी का यह ऐलान बिहार चुनाव के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण है, जहां 6 और 7 नवंबर को पहले चरण के मतदान होने हैं, जबकि 14 नवंबर को नतीजे घोषित होंगे। महागठबंधन (आरजेडी, कांग्रेस, सीपीआई(एम), सीपीआई, सीपीएम और वीआईपी) बनाम एनडीए (बीजेपी, जेडीयू, एलजेपी(रामविलास), हम(सेकुलर) और आरएलएम) की इस जंग में वोटरों को आकर्षित करने के लिए दोनों पक्ष अपनी-अपनी घोषणाओं की बौछार कर रहे हैं। तेजस्वी ने प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया कि यह घोषणा "वैज्ञानिक अध्ययन" पर आधारित है और जीविका दीदियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को पूरा करने का प्रयास है। उन्होंने कहा, "जीविका दीदियों का जितना शोषण इस 'डबल इंजन' सरकार में हुआ है, शायद ही कभी हुआ हो। हमने यात्राओं के दौरान हर जिले में इन दीदियों से मुलाकात की। उनका सम्मान और अधिकार दिलाना हमारी जिम्मेदारी है।"
जीविका कार्यक्रम, जो बिहार सरकार का एक प्रमुख स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) आधारित पहल है, राज्य की ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का माध्यम बना हुआ है। वर्तमान में करीब 10 लाख महिलाएं इससे जुड़ी हैं, जो समूहों के माध्यम से छोटे-मोटे उद्यम चलाती हैं। हालांकि, इन दीदियों को अक्सर कम मानदेय, अनिश्चित रोजगार और ऊंची ब्याज दरों वाले लोन का सामना करना पड़ता है। तेजस्वी ने इन समस्याओं को लक्ष्य बनाते हुए विस्तृत योजना पेश की। घोषणा के अनुसार, सभी जीविका दीदियों को 30,000 रुपये मासिक वेतन दिया जाएगा, जो वर्तमान मानदेय से कई गुना अधिक है। इसके अलावा, सरकारी कार्यों के निष्पादन के लिए 2,000 रुपये का मासिक भत्ता, समूह अध्यक्षों और कोषाध्यक्षों के लिए अलग मानदेय, और हर कैडर सदस्य के लिए 5 लाख रुपये का बीमा कवर सुनिश्चित किया जाएगा। माई-बहिन योजना के तहत मिलने वाले लाभों को भी अलग से प्रदान करने का वादा किया गया है।
लेकिन सबसे चर्चित हिस्सा रहा बिना ब्याज लोन का। तेजस्वी ने कहा कि न केवल मौजूदा लोनों का ब्याज माफ होगा, बल्कि अगले दो वर्षों में नई ऋण सुविधा ब्याज-मुक्त होगी। यह कदम उन महिलाओं के लिए राहत की सांस बनेगा, जो बैंकों और सहकारी समितियों से ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज लेकर अपने समूहों को मजबूत करने की कोशिश करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घोषणा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति दे सकती है, क्योंकि जीविका दीदियां राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन एंड रूरल डेवलपमेंट (बिपार्ड) के एक पूर्व अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "यह वादा यदि लागू होता है, तो ग्रामीण महिलाओं की वित्तीय स्वतंत्रता बढ़ाएगा, लेकिन इसके लिए राज्य बजट में भारी आवंटन की जरूरत होगी। बिहार का वर्तमान राजकोषीय घाटा 3.5 प्रतिशत के आसपास है, ऐसे में इसे कैसे फंड किया जाएगा, यह देखना रोचक होगा।"
तेजस्वी ने इस ऐलान को अपनी पिछली घोषणा से जोड़ा, जिसमें हर परिवार को एक सरकारी नौकरी देने का वादा किया गया था। उन्होंने दोहराया कि सरकार बनते ही 20 दिनों के अंदर इसके लिए कानून बनाया जाएगा और 20 महीनों के भीतर लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा। "हमने पहले ऐतिहासिक घोषणा की थी। आज फिर एक कर रहे हैं। बिहार के लोग बदलाव के लिए तैयार हैं," उन्होंने कहा। इस वादे पर सवाल उठने की संभावना है, क्योंकि बिहार में करीब 2.5 करोड़ परिवार हैं, और हरेक को नौकरी देना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होगा। विपक्षी नेता इसे "असंभव सपना" बता सकते हैं, लेकिन तेजस्वी ने जवाब में वर्तमान सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार भ्रष्टाचार, अपराध, बेरोजगारी और पलायन को रोकने में विफल रही है। माई-बहिन योजना को "चुनावी रिश्वत" बताते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि इसके तहत दिए जाने वाले 10,000 रुपये वास्तव में लोन हैं, जिसे सरकार बाद में वसूलेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह ऐलान महिलाओं और युवाओं पर केंद्रित है, जो बिहार की वोटर आबादी का बड़ा हिस्सा हैं। 2020 के चुनावों में महागठबंधन को 110 सीटें मिली थीं, लेकिन गठबंधन टूटने के बाद तेजस्वी ने अकेले दम पर विपक्ष की कमान संभाली। अब 2025 में सीट बंटवारे पर चर्चा तेज है। तेजस्वी शनिवार को ही कांग्रेस नेता अशोक गहलोत से मिलने वाले हैं, जहां महागठबंधन में सीटों का समीकरण तय होगा। एक वरिष्ठ राजनीतिक टिप्पणीकार ने कहा, "तेजस्वी की रणनीति साफ है- सामाजिक न्याय और आर्थिक सुधारों पर जोर। बिना ब्याज लोन जैसे वादे ग्रामीण बिहार को छू सकते हैं, जहां ऋण बोझ एक बड़ी समस्या है।"
हालांकि, एनडीए की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन बीजेपी के एक प्रवक्ता ने अनौपचारिक बातचीत में इसे "खोखला वादा" करार दिया। उन्होंने कहा, "2015 में भी ऐसे वादे किए गए थे, लेकिन लागू नहीं हुए। बिहार का विकास एनडीए के नेतृत्व में ही संभव है।" दूसरी ओर, जीविका दीदियों के संगठनों ने स्वागत किया है। पटना जिले की एक जीविका समूह की अध्यक्ष रानी देवी ने कहा, "हम सालों से स्थायी नौकरी और ब्याज माफी की मांग कर रही हैं। यदि यह वादा पूरा होता है, तो हमारा जीवन बदल जाएगा।"



