कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल ही में वोटर वेरिफिकेशन और मतदाता सूची में अनियमितताओं को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्क्रीन पर प्रजेंटेशन दिया। इस प्रजेंटेशन में उन्होंने कर्नाटक और महाराष्ट्र में मतदाता सूची में कथित तौर पर फर्जी वोटरों और संदिग्ध नामों के शामिल होने का दावा किया। उन्होंने चुनाव आयोग (ECI) पर गंभीर सवाल उठाए और मतदाता सूची में पारदर्शिता की मांग की।
कर्नाटक में फर्जी वोटरों का दावा
राहुल गांधी ने अपने प्रजेंटेशन में कर्नाटक की एक लोकसभा सीट का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर फर्जी वोटर जोड़े गए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी टीम ने छह महीने तक एक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची का डिजिटल किया, जिसके बाद "वोट चोरी" की प्रक्रिया का खुलासा हुआ।
कर्नाटक में एक सीट पर 50, 60 और 65 साल की उम्र के हजारों नए वोटरों के नाम जोड़े गए, जबकि 18 साल से अधिक उम्र के कई वैध वोटरों के नाम सूची से हटा दिए गए। यह प्रक्रिया "चुनावी धांधली" का हिस्सा है, और उनके पास इसके "100% पुख्ता सबूत" हैं।राहुल गांधी ने कहा कि कर्नाटक में यह धांधली संगठित तरीके से की गई, और उनकी पार्टी इसे जनता और चुनाव आयोग के सामने लाएगी।
महाराष्ट्र में 40 लाख संदिग्ध नाम
राहुल गांधी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी ने दावा किया कि 2019 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव के बीच पांच साल में महाराष्ट्र में 32 लाख नए वोटर जोड़े गए, लेकिन 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच केवल पांच महीनों में 39 लाख नए वोटर जोड़े गए। उन्होंने शिरडी विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण दिया, जहां एक ही बिल्डिंग में 7,000 से अधिक वोटरों का रजिस्ट्रेशन हुआ।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि ये नए वोटर मुख्य रूप से उन सीटों पर जोड़े गए, जहां भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने जीत हासिल की। राहुल गांधी ने कहा कि उनकी पार्टी ने बार-बार चुनाव आयोग से मतदाता सूची और संबंधित डेटा मांगा, लेकिन आयोग ने इसे साझा करने से इनकार कर दिया।
चुनाव आयोग का जवाब
चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के आरोपों को "निराधार" और "भ्रामक" बताते हुए खारिज किया है। आयोग के अनुसार, महाराष्ट्र में 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच 40.81 लाख नए वोटर जोड़े गए, न कि राहुल गांधी द्वारा दावा किए गए 70 लाख। यह वृद्धि जनसंख्या वृद्धि और मतदाता पंजीकरण की सामान्य प्रक्रिया के अनुरूप है। शिरडी में कथित फर्जी वोटरों की शिकायत पर आयोग ने कहा कि अगस्त 2024 में स्थानीय कांग्रेस कमेटी की शिकायत के बाद जांच की गई थी। यह पाया गया कि कई नए रजिस्टर्ड वोटर शिरडी के निवासी नहीं थे, और कुछ मेडिकल कॉलेज के छात्र थे, जो पहले से ही अपने मूल निर्वाचन क्षेत्रों में रजिस्टर्ड थे।
आयोग ने कहा कि मतदाता सूची में व्यक्तिगत जानकारी, जैसे नाम और पता, साझा करना जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 94 का उल्लंघन होगा, जो मतदान की गोपनीयता को सुनिश्चित करता है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को मतदाता सूची की दो मुफ्त प्रतियां दी जाती हैं, और यह डेटा उनकी वेबसाइट पर डाउनलोड के लिए उपलब्ध है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
कांग्रेस ने इस मुद्दे को देशव्यापी बनाने की योजना बनाई है। कर्नाटक में विरोध प्रदर्शन और बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ आंदोलन की घोषणा की गई है। पार्टी ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दलों के पक्ष में मतदाता सूची में हेराफेरी की जा रही है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह उनकी पार्टी की संभावित हार की हताशा का परिणाम है। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने भी इसे पुराने कानूनों से जोड़कर पलटवार किया।
बिहार में पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने राहुल गांधी के दावों का समर्थन करते हुए कहा कि यह "वोट की चोरी नहीं, बल्कि डकैती" है। उन्होंने मांग की कि यदि फर्जी वोटरों के आरोप सही हैं, तो संबंधित विधानसभा क्षेत्रों को भंग किया जाए।
बिहार में SIR का मुद्दा
राहुल गांधी ने बिहार में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को भी अपने प्रजेंटेशन में शामिल किया। उन्होंने दावा किया कि बिहार में 52 लाख वोटरों के नाम हटाने की प्रक्रिया में गड़बड़ी हो रही है, जिसमें 18.67 लाख मृत, 26.01 लाख विस्थापित, और 7.51 लाख डुप्लिकेट वोटर शामिल हैं। उन्होंने इसे सत्तारूढ़ दलों के पक्ष में धांधली का हिस्सा बताया।



