भारतीय विज्ञापन उद्योग के एक युग का अंत हो गया। 'फेविकॉल का जॉड टूट गया' – यह शब्द filmmaker हंसल मेहता के ट्वीट से ही सार्थक हो उठे, जब 70 वर्षीय पीयूष पांडे ने शुक्रवार सुबह अंतिम सांस ली। ओगिल्वी इंडिया के पूर्व ग्लोबल चीफ क्रिएटिव ऑफिसर और पद्मश्री प्राप्त इस दिग्गज कॉपीराइटर ने भारतीय विज्ञापन को न केवल घरेलू स्वाद दिया, बल्कि राजनीतिक मंच पर भी अपनी अमिट छाप छोड़ी। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की ऐतिहासिक जीत का प्रतीक बने 'अबकी बार मोदी सरकार' नारे के रचयिता पांडे का निधन संक्रमण से जूझते हुए एक महीने लंबे कोमा के बाद हुआ। उनके अंतिम संस्कार का आयोजन शनिवार सुबह 11 बजे मुंबई के शिवाजी पार्क में किया जाएगा।
पीयूष पांडे का जन्म 1955 में जयपुर के एक पारंपरिक राजस्थानी परिवार में हुआ था। नौ भाई-बहनों वाले इस परिवार में वे बड़े भाई थे, जिनमें प्रसिद्ध गीतकार व फिल्म निर्देशक प्रून पांडे और राजस्थानी लोक संगीत की धाकड़ गायिका व अभिनेत्री ईला अरुण भी शामिल हैं। बचपन से ही क्रिकेट के शौकीन पांडे ने राजस्थान के लिए रणजी ट्रॉफी में भी बल्लेबाजी की। जयपुर के सेंट जेवियर्स स्कूल से शिक्षा ग्रहण करने के बाद वे दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज पहुंचे, जहां से उन्होंने इतिहास में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। लेकिन विज्ञापन की दुनिया में कदम रखने से पहले उन्होंने चाय टेस्टिंग और निर्माण क्षेत्र में भी हाथ आजमाया। यह विविधता ही थी जो बाद में उनकी रचनात्मकता का आधार बनी।
1982 में 27 वर्ष की उम्र में ओगिल्वी एंड माथर (अब ओगिल्वी इंडिया) में ट्रेनी अकाउंट एक्जीक्यूटिव के रूप में करियर की शुरुआत करने वाले पांडे ने जल्द ही क्रिएटिव विभाग में कदम रखा। यहां से शुरू हुई उनकी यात्रा भारतीय विज्ञापन को वैश्विक पटल पर स्थापित करने वाली साबित हुई। सनलाइट डिटर्जेंट के लिए लिखा उनका पहला विज्ञापन था, लेकिन जल्द ही वे ब्रांड्स के चेहरों को बदलने वाले जादूगर बन गए। राष्ट्रीय क्रिएटिव डायरेक्टर, इंडिया के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन और ग्लोबल चीफ क्रिएटिव ऑफिसर तक पहुंचे पांडे ने ओगिल्वी को 12 वर्षों तक इकोनॉमिक टाइम्स की एजेंसी रेकॉनर सर्वे में नंबर वन एजेंसी का खिताब दिलाया। 2004 में वे कान्स लायंस इंटरनेशनल फेस्टिवल ऑफ क्रिएटिविटी के जूरी प्रेसिडेंट बने – एशिया के पहले व्यक्ति के रूप में। 2012 में क्लियो लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड और 2016 में पद्मश्री से सम्मानित होने वाले वे पहले भारतीय विज्ञापनकर्मी बने। हाल ही में 2024 में एलआईए लेजेंड अवॉर्ड से नवाजे गए।
पांडे की सबसे बड़ी ताकत थी हिंदी और स्थानीय बोलचाल को विज्ञापन का हथियार बनाना। उस दौर में जब विज्ञापन अंग्रेजी की चादर ओढ़े थे, उन्होंने 'हर खुशी में रंग लाए' (एशियन पेंट्स) जैसे नारों से आम आदमी की जुबान पकड़ी। कैडबरी के 'कुछ खास है जोश में बहादुरी है' ने चॉकलेट को भावनाओं का प्रतीक बना दिया, जबकि फेविकॉल के 'अंडे वाले' विज्ञापन ने चिपकने की मजबूती को हास्य से सजाया। हच (बाद में वोडाफोन) के पग कैंपेन ने मोबाइल को दोस्ताना बना दिया, और फॉर्च्यून ऑयल व लूना मोपेड जैसे ब्रांड्स को घर-घर पहुंचाया। 2003 में कोटक महिंद्रा बैंक के लॉन्च के लिए 'कॉमन सेंस' कैंपेन लिखा, जिसने बैंकिंग को सरल बनाया। कोटक के संस्थापक उदय कोटक ने ट्वीट कर कहा, "पीयूष पांडे का जाना दुखद है। उन्होंने 2003 में कोटक को 'कॉमन सेंस' से लॉन्च किया। एक अद्भुत विचारक और विनम्र व्यक्ति। भारतीय संदर्भ में रचनात्मकता बुनते थे। उन्हें बहुत याद आएंगे।"
लेकिन पांडे का योगदान विज्ञापन तक सीमित नहीं रहा। राजनीतिक मंच पर उनका 'अबकी बार मोदी सरकार' नारा 2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा की जीत का सबसे बड़ा हथियार साबित हुआ। 'अच्छे दिन आने वाले हैं' के साथ यह नारा पूरे देश में गूंजा, और नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह नारा इतना प्रभावी था कि आज भी राजनीतिक बहसों में उद्धृत होता है। पांडे ने राष्ट्रीय एकता के गीत 'माइल सुर मेरा तुम्हारा' के लिए गीत लिखे, जो विविधता में एकता का प्रतीक बना। 'भोपाल एक्सप्रेस' फिल्म के स्क्रीनप्ले में सह-लेखन किया, और जॉन अब्राहम की 'मद्रास कैफे' में कैबिनेट सेक्रेटरी की भूमिका निभाई। आईसीआईसीआई बैंक के मैजिक पेंसिल प्रोजेक्ट वीडियोज में अभिनय भी किया।
शुक्रवार सुबह मुंबई के एक अस्पताल में उनका निधन हो गया। एक महीने से कोमा में थे, जो संक्रमण से उपजा था। समाचार मिलते ही विज्ञापन जगत शोक में डूब गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा, "श्री पीयूष पांडे जी अपनी रचनात्मकता के लिए प्रशंसित थे। विज्ञापन और संचार जगत में उनका योगदान ऐतिहासिक है। वर्षों की हमारी बातचीत को याद रखूंगा। उनके निधन से दुखी हूं। उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ मेरी संवेदनाएं। ओम शांति।" वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, "श्री पीयूष पांडे के निधन से दुखी। भारतीय विज्ञापन के टाइटन और लेजेंड, उन्होंने रोजमर्रा की मुहावरों, मिट्टी के हास्य और सच्ची गर्मजोशी से संचार को बदल दिया। विभिन्न अवसरों पर उनसे मिला। परिवार, मित्रों और क्रिएटिव ब्रदरहुड को हार्दिक संवेदना। उनकी विरासत पीढ़ियों को प्रेरित करेगी।"
लेखक-कॉलमिस्ट सुहेल सेठ ने उन्हें अपना 'प्रिय मित्र' बताते हुए कहा, "भारत ने न केवल एक महान विज्ञापन मन खोया, बल्कि एक सच्चे देशभक्त और सज्जन व्यक्ति को। अब स्वर्ग 'माइल सुर मेरा तुम्हारा' पर नाचेगा।" ओगिल्वी के पूर्व सहकर्मी और इंडस्ट्री के दिग्गजों ने उन्हें 'भारतीय विज्ञापन की आवाज' कहा। ईला अरुण ने परिवार की ओर से शोक संदेश जारी किया, जबकि प्रून पांडे ने भाई के योगदान को सलाम किया।
पीयूष पांडे की पत्नी नीता पांडे और परिवार ने निजता का अनुरोध किया है। उनकी मृत्यु से न केवल विज्ञापन, बल्कि सिनेमा, संगीत और राजनीति के क्षेत्र शून्य हो गए। चार दशकों से अधिक समय तक उन्होंने भारतीय ब्रांडिंग को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई। कान्स से लेकर पद्मश्री तक, उनकी यात्रा प्रेरणा का स्रोत बनी। आज जब सोशल मीडिया पर उनके विज्ञापनों के क्लिप वायरल हो रहे हैं, तो लगता है कि उनका जॉड कभी नहीं टूटेगा। 'अबकी बार' नहीं, बल्कि हमेशा के लिए मोदी सरकार का नारा याद रहेगा, जैसे फेविकॉल की मजबूती। ओम शांति।
पीएम मोदी ने जताया दुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को भारतीय विज्ञापन उद्योग के महान हस्ताक्षर पीयूष पांडे के निधन पर गहन शोक व्यक्त किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में पीएम मोदी ने पांडे की रचनात्मक प्रतिभा की सराहना की और उनके साथ बिताए पलों को याद किया।
पीएम ने लिखा, "श्री पीयूष पांडे जी अपनी रचनात्मकता के लिए प्रशंसित थे। विज्ञापन और संचार जगत में उनका योगदान ऐतिहासिक है। वर्षों की हमारी बातचीत को याद रखूंगा। उनके निधन से दुखी हूं। उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ मेरी संवेदनाएं। ओम शांति।"
आपको बता दें पीएम मोदी और पांडे के बीच का नाता गहरा था, खासकर 2014 के लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान। पांडे द्वारा रचित नारे ने भाजपा की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मोदी का यह शोक संदेश न केवल व्यक्तिगत दुख व्यक्त करता है, बल्कि विज्ञापन क्षेत्र के एक युग के अंत पर राष्ट्रीय स्तर का श्रद्धांजलि भी है।



