नेपाल में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच एक ऐतिहासिक क्षण आया है। पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की ने 12 सितंबर 2025 को नेपाल की पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शीतल निवास में आयोजित समारोह में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। यह कदम देश में Gen-Z प्रदर्शनकारियों के आंदोलन और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद उठाया गया, जिसने नेपाल को गहरे राजनीतिक संकट में डाल दिया था।
नेपाल में हाल के हफ्तों में राजनीतिक अस्थिरता तब शुरू हुई, जब सरकार ने सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया। इस फैसले के खिलाफ हजारों युवा, विशेष रूप से Gen-Z समूह, सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग और सोशल मीडिया बैन के खिलाफ आवाज उठाई। स्थिति तब और बिगड़ गई, जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई, जिससे देश में अराजकता फैल गई।
इन प्रदर्शनों ने सरकार पर दबाव बढ़ाया, और परिणामस्वरूप, 9 सितंबर को केपी शर्मा ओली को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने संसद भंग करने का फैसला लिया और सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त किया। नई सरकार को 6 महीने के भीतर नए संसदीय चुनाव कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसके लिए 21 मार्च 2026 की तारीख तय की गई है।
कौन है सुशीला कार्की?
सुशीला कार्की नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रही हैं, जिन्होंने 2016 में यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की थी। उनकी निष्पक्षता और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रवैये ने उन्हें जनता, विशेष रूप से युवाओं, के बीच लोकप्रिय बनाया। अपने न्यायिक करियर में, कार्की ने कई साहसिक फैसले लिए, जिनमें तत्कालीन सूचना और संचार मंत्री जयप्रकाश गुप्ता को भ्रष्टाचार के आरोप में जेल भेजना शामिल है। यह नेपाल के इतिहास में पहली बार था, जब किसी मौजूदा मंत्री को जेल की सजा सुनाई गई। इसके अलावा, उन्होंने एंटी-करप्शन ब्यूरो के प्रमुख लोकमान सिंह कार्की को पद से हटाने का आदेश दिया था।
2017 में प्रचंड सरकार द्वारा उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था, जिसमें उन पर न्यायपालिका की स्वतंत्रता का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया था। हालांकि, जनता और सुप्रीम कोर्ट के समर्थन के बाद यह प्रस्ताव वापस लेना पड़ा। इस घटना ने उनकी लोकप्रियता को और बढ़ाया, खासकर युवाओं के बीच, जो उन्हें एक निष्पक्ष और निर्भीक नेता के रूप में देखते हैं।
Gen-Z का समर्थन
Gen-Z प्रदर्शनकारियों ने सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तावित किया, क्योंकि वे एक गैर-राजनीतिक और भ्रष्टाचार-विरोधी छवि वाले नेता की तलाश में थे। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिग्देल की मौजूदगी में हुई बैठकों में कार्की के नाम पर सहमति बनी। उनकी नियुक्ति को नेपाल में एक नई और पारदर्शी व्यवस्था की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
शपथ ग्रहण के बाद, कार्की ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में 4 मार्च 2026 को आम चुनाव कराने का प्रस्ताव रखा, जिसे जल्द ही औपचारिक रूप से घोषित किया जाएगा। इसके अलावा, उन्होंने एक तीन सदस्यीय मंत्रिमंडल भी गठित किया है, जिसमें प्रमुख नेताओं को शामिल किया गया है।
भारत ने सुशीला कार्की के नेतृत्व में बनी अंतरिम सरकार का स्वागत किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X पर नेपाली और हिंदी में बधाई संदेश देते हुए कहा, "भारत नेपाल की शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है।" भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी एक बयान जारी कर कहा कि यह कदम नेपाल में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देगा। कार्की का भारत से खास नाता है, क्योंकि उनकी शिक्षा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में हुई थी। हालांकि, कुछ विवाद भी सामने आए हैं। कार्की के पति, दुर्गा सुवेदी, का नाम 1973 में हुए एक विमान अपहरण कांड से जुड़ा है, जो नेपाली कांग्रेस के नेता वीपी कोइराला के करीबी थे। इस घटना की चर्चा भारत में भी खूब हुई थी।
सुशीला कार्की की नियुक्ति ने नेपाल में एक नए युग की शुरुआत की है। उनकी भ्रष्टाचार-विरोधी छवि और Gen-Z का समर्थन उन्हें इस संकटकाल में एक मजबूत नेता बनाता है। हालांकि, उनके सामने कई चुनौतियां हैं, जिनमें नई सरकार का गठन, चुनाव की तैयारी, और देश में शांति और स्थिरता बहाल करना शामिल है। नेपाल की जनता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय उनकी हर कदम पर नजर रखे हुए हैं।
नेपाल के इस ऐतिहासिक कदम ने न केवल देश की राजनीति को एक नई दिशा दी है, बल्कि यह भी दिखाया है कि युवा शक्ति और निष्पक्ष नेतृत्व मिलकर बदलाव ला सकते हैं। सुशीला कार्की का यह नया सफर निश्चित रूप से नेपाल के भविष्य को आकार देगा।



