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महाराष्ट्र की अजब राजनीति-गजब गठबंधन

महाराष्ट्र की अजब राजनीति-गजब गठबंधन

न्यूज प्लस डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र के लोकल चुनाव में हर रोज नए गठबंधन बन रहे हैं और रोज नए मुद्दे सामने आ रहे हैं। ऐसे-ऐसे गठबंधन बन रहे हैं जिनके बारे में कभी किसी ने सोचा नहीं होगा। महाराष्ट्र में एक साथ सरकार बनाने वाले लोकल चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं, तो सरकार में बैठे बड़े दल लोकल चुनाव जीतने के लिए विपक्ष यहां तक कांग्रेस और शरद पवार से भी हाथ मिला रहे हैं।

शरद पवार से टूटकर भाजपा से मिले भतीजे अजीत पवार लोकल चुनाव में एक बार फिर शरद की पार्टी एनसीपी के साथ दिखे। अजीत पवार ने पुणे में न केवल शरद पवार की पार्टी से गठबंधन किया है बल्कि उनकी बेटी सुप्रिया सुले के साथ मंच साझा किया और दोनों पार्टियों की ओर से संयुक्त घोषणापत्र जारी किया। जाहिर है अजीत पवार प्रदेश सरकार में भाजपा के साथ हैं और प्रदेश के डिप्टी सीएम हैं।

दूसरा चौकाने वाला समीकरण भाजपा-कांग्रेस का देखने को मिला। लोकल चुनाव में भाजपा को कांग्रेस नेताओं से समझौते में कोई गुरेज नहीं हुई, चुनाव जीतने के लिए भाजपा ने कांग्रेस का सहारा लिया। हालांकि कांग्रेस ने कहा भाजपा का साथ देने वाले नेता पार्टी से बाहर होंगे। एक जगह तो एकानथ सिंदे को किनारे कर भाजपा ने दूसरों से हाथ मिला लिया ताकि उसका अध्यक्ष बन सके, जबकि सिंदे प्रदेश में भाजपा के साथ सरकार में हैं और डिप्टी सीएम हैं।

तीसरा चौकाने वाला गठबंधन तब सामने आया जब ठाकरे बंधु एक मंच पर दिखे। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने लोकल चुनाव खासकर मुंबई का लोकल चुनाव जूतने के लिए हाथ मिला लिया है। 20 साल बाद दोनों भाई फिर एक साथ आए हैं, मराठी के मुद्दे पर दोनों मिलकर चुनाव जीतने की जुगत में हैं। मजेदार बात तो यह है कि सभी महाराष्ट्र की जनता को मुर्ख समझ से अपने इन गठबधनों को जायज भी ठहरा रहे हैं, मुद्दों के बारे में बात करने पर ये नेता कहते हैं कि वह तो सिर्फ महाराष्ट्र का विकास चाहते हैं लेकिन यह नहीं बताते कि इन अनैतिक गठबंधनों से आखिर विकास कैसे कर पाएंगे। अब जनता सोचने को मजबूर है आखिर कौन किसके साथ है और कौन किसका विरोधी है।

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