मेरठ के चर्चित ललिता गौतम हत्याकांड पर अब बसपा प्रमुख मायावती भी खुलकर सामने आ गई हैं। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पीड़ित परिवार और दलित समाज को किसी भी हाल में कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए। उनका कहना था कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने हमेशा संवैधानिक तरीके से न्याय की लड़ाई लड़ने का संदेश दिया है। अगर किसी को निचली अदालत से न्याय नहीं मिलता तो उसे उच्च अदालत का दरवाजा खटखटाना चाहिए।
विपक्ष पर लगाया राजनीति का आरोप
मायावती ने बिना किसी का नाम लिए कुछ विपक्षी नेताओं और संगठनों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग पीड़ित परिवार के दर्द का इस्तेमाल अपनी राजनीति चमकाने के लिए कर रहे हैं। उनके मुताबिक ऐसे लोग लोगों को सड़क पर उतरने, चक्काजाम करने और माहौल बिगाड़ने के लिए उकसाते हैं, जबकि इससे पीड़ितों को न्याय मिलने के बजाय उनकी मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।
वोट की ताकत पर दिया जोर
बसपा प्रमुख ने कहा कि दलित और वंचित समाज को अपनी राजनीतिक ताकत को समझना होगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि भावनाओं में बहने के बजाय लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज मजबूत करें। उनके अनुसार अगर समाज अपनी राजनीतिक भागीदारी बढ़ाएगा, तभी उसे अपने अधिकार और न्याय मजबूती से मिल सकेंगे।
क्या है पूरा मामला?
मेरठ में 15 मई को दलित युवती ललिता गौतम की हत्या के बाद लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। हाल ही में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ था, जिसके बाद यह मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया। पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे हैं। अब मायावती के बयान के बाद इस मामले की सियासत और तेज होने की संभावना है।
