बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की रणभेरी बजते ही जनता दल (यूनाइटेड) में आंतरिक कलह ने जोर पकड़ लिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जेडीयू ने पार्टी बागियों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए रविवार को विधायक गोपाल मंडल समेत पांच नेताओं को प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया। यह कार्रवाई शनिवार को 11 नेताओं के निष्कासन के बाद की गई है, जिससे कुल 16 नेताओं का पत्ता साफ हो गया। पार्टी ने इन नेताओं पर 'पार्टी विरोधी गतिविधियों' और 'संगठनात्मक अनुशासन का उल्लंघन' का आरोप लगाया है।
जेडीयू की राज्य महासचिव चंदन कुमार सिंह द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, निष्कासित नेताओं में गोपाल मंडल (गोपालपुर विधायक, भागलपुर), पूर्व विधायक महेश्वर यादव, पूर्व एमएलसी संजीव श्याम सिंह, पूर्व मंत्री हिमराज सिंह और एक अन्य नेता शामिल हैं। गोपाल मंडल का मामला सबसे चर्चित रहा है। वे चार बार विधायक रह चुके हैं और पिछली बार भी गोपालपुर सीट से जीत हासिल कर चुके थे। लेकिन जब पार्टी ने टिकट न देने का फैसला किया, तो मंडल ने 14 अक्टूबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पटना स्थित निवास के बाहर धरना दे दिया। उन्होंने टिकट की मांग की और नीतीश पर 'बाहरी लोगों को तरजीह देने' का आरोप लगाया। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और स्थानीय जेडीयू सांसद अजय मंडल ने उनके खिलाफ मानहानि का एफआईआर दर्ज कराया।
अंततः टिकट आरजेडी के बागी बुलो मंडल को मिला, जिसके बाद गोपाल मंडल ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया। पार्टी ने उन्हें 'पार्टी की विचारधारा के विरुद्ध कार्य' का दोषी ठहराते हुए तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया। इसी तरह, पूर्व एमएलसी संजीव श्याम सिंह गया जिले की गुरुआ सीट से प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। पूर्व मंत्री हिमराज सिंह कटिहार से निर्दलीय उम्मीदवार हैं। शनिवार को निष्कासित 11 नेताओं में पूर्व मंत्री शैलेश कुमार का नाम प्रमुख था, जो मुंगेर के जमालपुर से निर्दलीय लड़ रहे हैं।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, ये कार्रवाइयां चुनावी रणनीति का हिस्सा हैं। जेडीयू ने 101 सीटों पर उम्मीदवारों की सूची जारी की है, जिसमें कई पुराने चेहरों को दरकिनार कर नए या एनडीए के सहयोगियों को मौका दिया गया है। लेकिन इससे असंतोष भड़क गया। बागी नेताओं का कहना है कि टिकट वितरण में 'ऊपरी जातियों' और 'बाहरी लोगों' को प्राथमिकता दी गई, जबकि पिछड़ी जातियों के मूल कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया गया।
बिहार में सियासी घमासान
बिहार विधानसभा चुनाव नवंबर 2025 में दो चरणों में होने हैं। एनडीए (जेडीयू-बीजेपी-एलजेपी-आरएलएम-एचएएम) और महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस-लेफ्ट) के बीच कांटे की टक्कर है। जेडीयू को 101 सीटें मिली हैं, लेकिन आंतरिक विद्रोह से पार्टी की एकजुटता पर सवाल उठ रहे हैं। नीतीश कुमार, जो दस साल में तीन बार गठबंधन बदल चुके हैं, पिछली बार महागठबंधन से एनडीए में लौटे थे। उनकी सरकार पिछड़ी और अति पिछड़ी जातियों पर टिकी है, लेकिन गोपाल मंडल जैसे नेताओं का विद्रोह इस आधार को कमजोर कर सकता है।
गोपाल मंडल का राजनीतिक सफर विवादों से भरा रहा है। वे अक्सर अपनी बेबाकी के लिए चर्चा में रहते हैं। एक बार ट्रेन में अंडरवियर पहनकर विरोध जताया था, तो कभी सहयोगियों पर 'वसूली' का आरोप लगाया। भागलपुर के गोपालपुर में उनकी मजबूत पकड़ है, जहां पिछड़ी जाति के वोट निर्णायक हैं। यदि वे निर्दलीय जीत जाते हैं, तो यह जेडीयू के लिए बड़ा झटका होगा। इसी तरह, संजीव श्याम सिंह का जन सुराज से जुड़ना विपक्ष को मजबूत कर सकता है।
एनडीए में चिंता
महागठबंधन ने इस कार्रवाई को 'नीतीश की तानाशाही' करार दिया। आरजेडी नेता तेजस्वी यादाव ने ट्वीट कर कहा, "नीतीश जी अब अपने ही लोगों को कुचल रहे हैं। बिहार की जनता सब देख रही है।" वहीं, बीजेपी ने चुप्पी साधी है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि एनडीए में सीट बंटवारे पर असंतोष है। जेडीयू के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी ने कहा, "पार्टी अनुशासन सर्वोपरि है। बागी हमें कमजोर नहीं कर सकते।"
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. राजीव रंजन कहते हैं, "यह जेडीयू की पुरानी रणनीति है। 2010 और 2020 में भी बागियों को साफ किया गया था। लेकिन इस बार संख्या ज्यादा है, जो एनडीए की जीत को प्रभावित कर सकती है।" पटना विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के मुताबिक, "गोपाल मंडल जैसे स्थानीय चेहरों का विद्रोह ग्रामीण क्षेत्रों में वोट ट्रांसफर को बाधित करेगा।"
क्या होगा जेडीयू का?
नीतीश कुमार की जेडीयू बिहार की सियासत का केंद्र रही है। 2020 में 43 सीटें जीतकर वे सत्ता में लौटे, लेकिन अब विकास, रोजगार और जातिगत समीकरणों पर सवाल उठ रहे हैं। बागियों का निष्कासन पार्टी को अनुशासित तो बनाएगा, लेकिन वोट बैंक पर असर पड़ेगा। यदि ये बागी महागठबंधन या जन सुराज से जुड़ जाते हैं, तो चुनावी समीकरण उलट सकते हैं।
एनडीए को अब एकजुट रहना होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया बिहार यात्रा से एनडीए को बल मिला है, लेकिन आंतरिक कलह से फायदा विपक्ष को हो सकता है। जेडीयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा, "हमारी जीत निश्चित है। बागी खुद को नुकसान पहुंचा रहे हैं।



