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86 करोड़ के खर्च पर उठे बड़े सवाल, आयकर विभाग की रिपोर्ट से फिर चर्चा में आए आजम खान, पढ़ें मामला

86 करोड़ के खर्च पर उठे बड़े सवाल, आयकर विभाग की रिपोर्ट से फिर चर्चा में आए आजम खान, पढ़ें मामला

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आजम खान एक बार फिर चर्चा में हैं। आयकर विभाग ने 147 पेज की रिपोर्ट जारी करते हुए मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट का चैरिटेबल पंजीकरण रद्द कर दिया है। रिपोर्ट में ट्रस्ट के कामकाज और वित्तीय लेनदेन को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में भी इस मामले को लेकर बहस तेज हो गई है।

रिपोर्ट में किन बातों पर सवाल?

आयकर विभाग की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि करीब 500 करोड़ रुपये की लागत वाली यूनिवर्सिटी का निर्माण सिर्फ 46 करोड़ रुपये में दिखाया गया। इसके अलावा यह भी सवाल उठाया गया है कि जल निगम के अध्यक्ष और नगर विकास मंत्री रहते हुए सरकारी बजट का इस्तेमाल विश्वविद्यालय के निर्माण में कैसे हुआ। ट्रस्ट के बैंक खातों में जमा धन के स्रोत पर भी रिपोर्ट में सवाल उठाए गए हैं।

86 करोड़ के सरकारी ठेकों का जिक्र

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2015 से 2017 के बीच दो निजी फर्मों को सात सरकारी ठेके दिए गए, जिनकी कुल लागत 86 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई गई है। आरोप है कि इन ठेकों के जरिए विश्वविद्यालय परिसर में सड़क और अन्य निर्माण कार्य कराए गए। आयकर विभाग ने इन खर्चों और प्रक्रियाओं को लेकर भी कई सवाल दर्ज किए हैं।

ट्रस्ट की संरचना पर भी उठे सवाल

आयकर विभाग का दावा है कि ट्रस्ट के नौ सदस्यों में पांच सदस्य आजम खान के परिवार से जुड़े हैं। वहीं, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ अन्य सदस्यों को ट्रस्ट के कामकाज की जानकारी नहीं थी और उनसे केवल दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए जाते थे। इन दावों को रिपोर्ट का हिस्सा बनाया गया है, जिनकी जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रह सकती है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज

इस मामले में भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने आरोप लगाया है कि सरकारी पद का दुरुपयोग कर जनता के टैक्स के पैसे से विश्वविद्यालय में काम कराया गया। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी दोहराई है। दूसरी ओर, आजम खान पहले भी अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते रहे हैं और खुद को निर्दोष बताते रहे हैं।

जांच और कानूनी प्रक्रिया पर रहेंगी नजरें

फिलहाल आयकर विभाग की रिपोर्ट के बाद मामला फिर चर्चा में है। हालांकि रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा। जब तक अदालत या संबंधित प्राधिकरण किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचते, तब तक इन आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाएगा। अब सभी की नजर आगे की कानूनी कार्रवाई और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया पर रहेगी।

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