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'बीजेपी आई तो बुलडोजर और जेल की नीति', ममता बनर्जी के बयान से चढ़ा सियासी तापमान ?

'बीजेपी आई तो बुलडोजर और जेल की नीति', ममता बनर्जी के बयान से चढ़ा सियासी तापमान ?

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पूर्व बर्धमान के खंडाघोष में चुनावी रैली के दौरान बीजेपी पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि अगर बीजेपी सत्ता में आई तो लोगों को अपना घर और पहचान तक खोनी पड़ सकती है। उनके मुताबिक राज्य में डर और असुरक्षा का माहौल पैदा किया जाएगा।

बुलडोजर राजनीति का आरोप
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बीजेपी सत्ता में आते ही बुलडोजर की राजनीति शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि लोगों को जेल में डाला जाएगा और उनकी संपत्ति छीन ली जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि आम जनता को बिना वजह परेशान किया जाएगा और राज्य में स्थिरता खत्म हो सकती है।

वेतन आयोग पर भी घेरा
रैली के दौरान ममता ने बीजेपी के 7वें वेतन आयोग लागू करने के वादे को भ्रामक बताया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार पहले ही फरवरी में इसे लागू करने की घोषणा कर चुकी है। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल ऐसा राज्य है जहां सरकारी कर्मचारियों को अब भी पेंशन की सुविधा मिलती है।

केंद्र सरकार पर सवाल
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए महंगाई का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम क्यों नहीं घटाए जा रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी बंगाल के उत्पादों के निर्यात को लेकर गलत जानकारी फैला रही है, जबकि राज्य पहले से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार कर रहा है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
ममता बनर्जी ने हुमायूं कबीर को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि अल्पसंख्यक वोटों को बांटने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने वायरल वीडियो पर भी सवाल उठाए और कहा कि इसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने बीजेपी पर अवैध गतिविधियों से जुड़े आरोप भी लगाए।

सरकार की उपलब्धियां गिनाईं
रैली में ममता ने अपनी सरकार की उपलब्धियां भी गिनाईं। उन्होंने कहा कि टीएमसी सरकार ने राज्य में विकास परियोजनाओं को बढ़ावा दिया है, जिसमें उद्योगों का आधुनिकीकरण और नए रोजगार के अवसर शामिल हैं। उनके अनुसार बेरोजगारी दर में भी कमी आई है और लाखों लोगों को रोजगार मिला है।

चुनाव से पहले बढ़ा सियासी तापमान
इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति और गर्म हो गई है। चुनाव नजदीक आते ही नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता इन दावों और आरोपों पर किसे भरोसा देती है और सत्ता की चाबी किसके हाथ में जाती है।

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