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ऑस्ट्रेलिया में पहली महिला आर्मी चीफ बनीं सुसान कॉयल, दुनिया में बढ़ रही महिला नेतृत्व की ताकत

ऑस्ट्रेलिया में पहली महिला आर्मी चीफ बनीं सुसान कॉयल, दुनिया में बढ़ रही महिला नेतृत्व की ताकत

ऑस्ट्रेलिया ने अपनी सैन्य व्यवस्था में बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। सुसान कॉयल को देश की नई आर्मी चीफ नियुक्त किया गया है। वह जुलाई से कार्यभार संभालेंगी और ऑस्ट्रेलियाई सेना का नेतृत्व करने वाली पहली महिला बनेंगी। इस फैसले को देश के रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स और प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने ऐतिहासिक बताया है।

शानदार सैन्य करियर की मिसाल
सुसान कॉयल ने 1987 में आर्मी रिजर्व से अपने करियर की शुरुआत की थी और 1992 में अधिकारी के रूप में नियुक्त हुईं। उन्होंने सूचना युद्ध, मिडिल ईस्ट में जॉइंट टास्क फोर्स और अफगानिस्तान में कमांडर के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उनके अनुभव और नेतृत्व क्षमता ने उन्हें इस बड़े पद तक पहुंचाया है।

परिवार और जिम्मेदारियों का संतुलन
कॉयल न सिर्फ एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी हैं, बल्कि तीन बच्चों की मां भी हैं। उनके पति भी सेना में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने सेना जॉइन की थी, तब महिलाओं की संख्या बहुत कम थी, लेकिन आज हालात बदल रहे हैं और महिलाएं उच्च पदों तक पहुंच रही हैं।

कनाडा में भी महिला नेतृत्व
ऑस्ट्रेलिया से पहले जेनी कैरिगन ने 2024 में कनाडा के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद संभालकर इतिहास रचा था। उन्होंने 35 साल से अधिक समय तक सेना में सेवा दी और कई अंतरराष्ट्रीय मिशनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में सेना में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी।

यूरोप में भी बनी मिसाल
स्लोवेनिया में लेन्का एर्मेन्क को 2018 में सेना प्रमुख बनाया गया था। वह नाटो देशों में इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला बनीं। उन्होंने लंबे समय तक सेना में सेवा दी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई।

लैटिन अमेरिका में भी बदलाव
बोलीविया में जीना रिके टेरान को 2015 में जनरल बनाया गया था। वह लैटिन अमेरिका में युद्धक टुकड़ियों का नेतृत्व करने वाली पहली महिला बनीं। उनकी नियुक्ति को महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम माना गया।

महिला नेतृत्व का बढ़ता प्रभाव
दुनिया भर में अब महिलाएं सेना जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। सुसान कॉयल की नियुक्ति न सिर्फ ऑस्ट्रेलिया बल्कि वैश्विक स्तर पर महिलाओं के लिए प्रेरणा है। यह दिखाता है कि अब योग्यता और नेतृत्व ही सबसे बड़ी पहचान बन रही है, लिंग नहीं।

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