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‘लिटिल-लिटिल पेग’ लिवर पर पड़ने लगा भारी

‘लिटिल-लिटिल पेग’ लिवर पर पड़ने लगा भारी

न्यूजप्लस डेस्क, राजेश द्विवेदी।
यहां लिबास की कीमत है आदमी की नहीं,
मुझे गिलास बड़े दें, शराब कम कर दें
भारतीय समाज , बशीर बद्र के इस दर्शन के साथ-साथ पंकज उधास की थोड़ी-थोड़ी पिया करो की गुजारिश से अच्छी तरह परिचित है पर यह शराब नए परिदृश्य में खतरनाक साबित हो रही है। शराब पीने का चलन बढ़ गया है, ऐसे में आप 60 एमएल (142 कैलोरी ) का पेग 6 महीने तक रोज पिएंगे तो आपका लिवर चौपट हो जाएगा। लगातार शराब का सेवन पहले फैटी लिवर, फिर हेपेटाइटिस बी-सी का शिकार बनाएगा। इस स्टेज पर शराब छोड़ दी और इलाज किया तो बच जाएंगे पर नहीं छोड़ने पर अल्कोहिलिक लिवर सिरोसिस की चपेट में आ जाएंगे। एक बार लिवर सिसोसिस हुई तो जिंदगी सौ फीसद खतरे में रहती है।
इसका खुलासा एसजीपीजीआई के हिपेटोलाजी विभाग के डॉ.अजय मिश्रा करते हैं। एक वैज्ञानिक सत्र में अपनी स्टडी का हवाला देते हुए डॉ.मिश्र ने कहा कि 15 साल पहले से अब युवाओं में शराब पीने का चलन चार गुना बढ़ गया है। 15 सालों में अल्कोहिलिक लिवर सिरोसिस टाप पर पहुंच गया है। इसने हेपेटाइटिस बी-सी पीछे तक दिया है।
लेडीज भी पीने लगीं
उन्होंने कहा कि दस सालों में युवतियों में शराब पीने का चलन बढ़ा, लिवर सिरोसिस का खतरा लेडीज में 60 तो पुरुषों में 40 फीसद होता है। शराब 100 बीमारियों को दावत देती है। चकने-शराब का मिश्रण आफत में से जाता है। युवाओं के शराब पीने से उत्पादकता घटती, फैमली विवाद और जीडीपी गिरती है। याद रखिए, एक बार लिवर सिरोसिस हो गई तो जिंदगी 3 साल की रह जाती है।
स्टडी में यह भी सामने आया....
-देश में 33 फीसद तक ज्यादा शराब पीने वाले लिवर सिरोसिस के शिकार हो रहे।
-शराब पीने वाले लोग फैटी लिवर के शिकार होते हैं, जरूरी नहीं कि वह मोटे ही हों
-70 फीसद लिवर बीमारी शराब से हो रही है
-2005 के बाद से युवा वर्ग शराब सबसे ज्यादा पीने लगा है
-लिवर बीमारियों से बचाने के लिए आधुनिक टेस्ट और दवाएं आ गईं
-लिवर सिरोसिस के इलाज में लिवर रिजेरेशन यानी प्लाज्मा थेेरेपी की जा रही है।
-शराब रम, ्ह्सस्किी, वोदका, देसी और बियर सभी लिवर को नुकसान पहुंचाती हैं।
-सभी को तत्काल शराब छोड़ने की नसीहत दी गई

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