होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक बार फिर दुनिया की चिंता बढ़ गई है। अमेरिका और ईरान के बीच भले ही फिलहाल खुला संघर्ष रुक गया हो, लेकिन इस अहम समुद्री रास्ते पर तनाव अब भी बना हुआ है। अब ईरान ने यहां से गुजरने वाले जहाजों के लिए नए नियम लागू कर दिए हैं। ईरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स नेवी ने जहाजों के लिए दो तय समुद्री रास्ते घोषित किए हैं और साफ कर दिया है कि बिना अनुमति किसी जहाज को सुरक्षित रास्ता नहीं मिलेगा।
जहाजों के लिए नया नियम
ईरान के नए ट्रांजिट नियमों के मुताबिक अब हर जहाज को पहले एक डिक्लेरेशन फॉर्म जमा करना होगा। इस फॉर्म में जहाज, उसके कार्गो और मालिक से जुड़ी पूरी जानकारी देनी होगी। इसके बाद ही जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया जाएगा। ईरान का कहना है कि यह कदम समुद्री सुरक्षा और नियंत्रण बनाए रखने के लिए उठाया गया है। माना जा रहा है कि ईरान इस रास्ते पर अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहता है क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से में तेल सप्लाई इसी मार्ग से होती है।
अमेरिका के प्रोजेक्ट से बढ़ी चिंता
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका एक बार फिर “फ्रीडम प्रोजेक्ट” शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इस मिशन के तहत अमेरिकी नेवी और एयर पावर का इस्तेमाल कर व्यापारी जहाजों को सुरक्षा देने की योजना बनाई जा रही है। अमेरिकी मीडिया के अनुसार यह प्रोजेक्ट इसी हफ्ते दोबारा शुरू हो सकता है। हालांकि इससे पहले अमेरिका ने इसे कुछ घंटों के भीतर ही रोक दिया था। माना जा रहा है कि इसी वजह से ईरान ने अब समुद्री रास्तों पर नए नियम लागू किए हैं।
सऊदी अरब ने भी दिखाई सख्ती
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि सऊदी अरब ने अमेरिका को अपने एयरस्पेस के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी। सऊदी अरब का मानना है कि अमेरिकी मिशन से क्षेत्र में तनाव और ज्यादा बढ़ सकता है। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि फ्रीडम प्रोजेक्ट को फिलहाल रोक दिया गया है ताकि युद्ध खत्म करने को लेकर समझौते की संभावना देखी जा सके। अमेरिका खाड़ी देशों के सहयोग पर काफी हद तक निर्भर माना जाता है।
दुनिया की बढ़ी चिंता
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्तों में गिना जाता है। यहां से रोजाना बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस दुनिया के कई देशों तक पहुंचती है। ऐसे में अगर यहां तनाव बढ़ता है तो उसका असर सीधे वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच टकराव अगर फिर तेज हुआ तो तेल की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।
वैश्विक बाजार पर असर संभव
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर अब दुनिया के कई देश नजर बनाए हुए हैं। जहाजों के लिए नए नियम लागू होने के बाद अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों की चिंता भी बढ़ गई है। आने वाले दिनों में अगर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सफल नहीं होती तो होर्मुज जलमार्ग एक बार फिर बड़े वैश्विक संकट का केंद्र बन सकता है।
