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BP की दवाओं पर बड़ा सवाल, क्वालिटी फेल होने से मरीजों की सेहत पर मंडराया खतरा

BP की दवाओं पर बड़ा सवाल, क्वालिटी फेल होने से मरीजों की सेहत पर मंडराया खतरा

आज के समय में ब्लड प्रेशर की समस्या तेजी से बढ़ रही है और लाखों लोग रोज दवाओं पर निर्भर हैं। लेकिन हाल ही में सामने आई रिपोर्ट ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। देश के अलग-अलग राज्यों से दवाओं के क्वालिटी टेस्ट में फेल होने के मामले सामने आए हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

रिपोर्ट में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
सीडीएससीओ की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले महीने कुल 198 दवाएं क्वालिटी टेस्ट में फेल पाई गईं। इनमें ब्लड प्रेशर की दवाओं की संख्या सबसे ज्यादा थी। यह स्थिति इसलिए गंभीर मानी जा रही है क्योंकि मरीज इन दवाओं पर पूरी तरह भरोसा करते हैं और इन्हीं से अपनी बीमारी को नियंत्रित रखते हैं।

दवा फेल होने की असली वजह
ब्लड प्रेशर की 18 दवाओं के बैच डिसॉल्यूशन टेस्ट में फेल पाए गए। इस टेस्ट से यह पता चलता है कि दवा शरीर में कितनी अच्छी तरह घुलती है। अगर दवा सही तरीके से घुलती नहीं है, तो उसका असर भी कम हो जाता है और मरीज को पूरा फायदा नहीं मिल पाता।

साइलेंट खतरा क्यों बढ़ रहा
इस समस्या को एक्सपर्ट्स ‘साइलेंट फेलियर’ कह रहे हैं। इसमें मरीज दवा तो लेता रहता है, लेकिन उसे सही असर नहीं मिलता। धीरे-धीरे उसका ब्लड प्रेशर कंट्रोल में नहीं आता और उसे इसका तुरंत पता भी नहीं चलता। यही वजह है कि यह खतरा ज्यादा गंभीर माना जा रहा है।

दिल और किडनी पर असर का डर
अगर लंबे समय तक दवाएं सही तरीके से काम नहीं करतीं, तो इससे हार्ट की बीमारी, स्ट्रोक और किडनी की समस्या का खतरा बढ़ सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह स्थिति धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती है, जिससे समय रहते इलाज करना मुश्किल हो सकता है।

निगरानी और जागरूकता जरूरी
भारत में पहले से ही ब्लड प्रेशर एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। ऐसे में दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठना और भी चिंता बढ़ाता है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि दवाओं की जांच को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि मरीजों को सुरक्षित और असरदार इलाज मिल सके।

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