वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत में भी दिखने लगा है। हीलियम गैस की सप्लाई प्रभावित होने से कई उद्योगों में चिंता बढ़ गई है। यह गैस सेमीकंडक्टर, ऑप्टिकल फाइबर और स्मार्टफोन बनाने में जरूरी होती है। सप्लाई रुकने से कंपनियों को उत्पादन में दिक्कत आने लगी है और काम की गति धीमी पड़ रही है।
होर्मुज में रुकावट बना कारण
जानकारी के अनुसार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आई रुकावटों के कारण हीलियम की सप्लाई प्रभावित हुई है। इस रास्ते से कई देशों तक गैस पहुंचती है। जब यहां बाधा आती है, तो इसका असर पूरी दुनिया की सप्लाई चेन पर पड़ता है। यही वजह है कि अब भारत में भी इसकी कमी महसूस की जा रही है और हालात चिंताजनक बनते जा रहे हैं।
सरकार ने शुरू की तैयारी
स्थिति को देखते हुए सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था पर काम शुरू कर दिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने अमेरिका और अल्जीरिया जैसे देशों से संपर्क किया है, ताकि सप्लाई को फिर से सामान्य किया जा सके। दुनिया में कुछ ही देश हीलियम का उत्पादन करते हैं, इसलिए किसी एक क्षेत्र में संकट आने से पूरे बाजार पर असर पड़ता है।
कीमतों में भी तेज उछाल
रिपोर्ट के मुताबिक, वेस्ट एशिया में हालात बिगड़ने के बाद हीलियम के निर्यात में कमी आई है। इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है और दाम में करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी जा रही है। इससे कंपनियों की लागत बढ़ रही है और इसका असर आने वाले समय में आम लोगों तक भी पहुंच सकता है।
अस्पतालों पर भी असर की आशंका
हीलियम सिर्फ उद्योगों के लिए ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी बेहद जरूरी है। एमआरआई मशीनों में इस्तेमाल होने वाले मैग्नेट को ठंडा रखने के लिए यही गैस काम आती है। भारत में हजारों एमआरआई मशीनें चल रही हैं, ऐसे में अगर सप्लाई लंबे समय तक प्रभावित रहती है तो अस्पतालों में भी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
आगे क्या हो सकते हैं हालात
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर जल्द सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो इसका असर कई सेक्टर पर गहरा हो सकता है। सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति बहाल करने की कोशिश कर रही है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह संकट कितनी जल्दी नियंत्रित होता है और बाजार पर इसका कितना असर पड़ता है।
