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राणासांगा को गद्दार कहने वाले सपा सांसद के घर हमला, बुलडोजर लेकर पहुंचे करणी सेना के कार्यकर्ता

राणासांगा को गद्दार कहने वाले सपा सांसद के घर हमला, बुलडोजर लेकर पहुंचे करणी सेना के कार्यकर्ता

राज्यसभा में राणा सांगा को गद्दार कहने वाले समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन के आगरा स्थित घर पर बुधवार को करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने हमला कर दिया। गुस्साए लोग अपने साथ बुलडोजर लेकर पहुंचे थे। वहां जमकर तोड़फोड़ और पथराव कर दिया। तोड़फोड़ और पथराव के बीच पुलिस ने मोर्चा संभाला तो कई पुलिसकर्मी भी घायल हो गए, पुलिस भीड़ को और स्थिति को नियंत्रण में लाने का प्रयास कर रही है।

जिस समय ये हंगामा हुआ, उस वक्त करीब 500 से अधिक करणी सेना के कार्यकर्ताओं थे,वहीं मौके पर पुलिस टीम भी मौजूद थी। करणी सेना के प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने कई इंतजाम किए, पुलिस और करणी सेना के बीच भिड़ंत भी हुई लेकिन पुलिस उन्हें काबू करने मे नाकाम रही। इसके बाद भी मामला नहीं संभला तो कई थानों की पुलिस फोर्स मौके पर बुलाई गई। पुलिस को बैरिकेडिंग करके करणी सेना के गुसाई लोगों को रोकना पड़ा। गुस्साए लोग जय श्री राम का नारा लगा रहे थे। इनका रास्ता रोकने की कोशिश की गई तो एक्सप्रेसवे से शहर के अंदर घुस गए। इसके बाद पुलिस ने उस सोसाईटी का गेट बंद करवा दिया जहां पर सांसद का आवास है, इस घटना के सामने आने के बाद देश की सियासत में गरमी बढ़ सकती है।

समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद रामजी लाल सुमन ने मेवाड़ के शासक राणा सांगा पर बीते 21 मार्च शुक्रवार को विवादित टिप्पणी की थी। रामजी लाल सुमन ने राणा सांगा को ‘गद्दार’ कहा था। इसके बाद से ही रामजी लाल सुमन का जमकर विरोध हो रहा है। राजस्थान की उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत समेत कई नेताओं और संगठनों ने रामजी लाल सुमन के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई थी।

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में करणी सेना के कई कार्यकर्ताओं ने सपा के प्रदेश कार्यालय के बाहर जमकर प्रदर्शन किया था। इसके साथ करणी सेना ने सांसद के रामजी लाल सुमन के खिलाफ इनाम का भी ऐलान किया था। करणी सेना ने घोषणा की थी कि सांसद रामजी लाल सुमन के चेहरे पर कालिख पोतने और उन्हें जूते मारने वाले को 500000 रुपये का इनाम दिया जाएगा।

किस बात पर हुआ विवाद

राज्यसभा में समाजवादी के सांसद रामजी लाल सुमन ने कहा था कि बीजेपी वालों का तकिया कलाम हो गया है कि मुसलमानों में बाबर का डीएनए है। सवाल उठाते हए बोले कि, फिर हिंदुओं में किसका डीएनए है? प्रश्न उठाया कि बाबर को कौन लाया ? खुद ही उत्तर देते हुए बोले कि इब्राहिम लोदी को हराने के लिए राणा सांगा ही बाबर को भारत में लाए थे। इस तरह उन्होंने कहा कि अगर मुसलमान बाबर की औलाद हैं तो तुम भी हिंदू गद्दार राणा सांगा की औलाद हुए? फिर बोले कि हिंदुस्तान में यह भी तय हो जाना चाहिए कि बाबर की आलोचना करते हैं तो फिर राणा सांगा की क्यो नहीं। सांसद ने कहा कि, हिंदुस्तान का मुसलमान बाबर को अपना आदर्श नहीं मानता है वह मोहम्मद साहब और सूफी परंपरा को आदर्श मानता है।

सफाई में कही थी ये बात

राज्यसभा में दिए गए अपने बयान पर सांसद रामजी लाल सुमन ने कहा था, 'बाबर राणा सांगा के निमंत्रण पर भारत आया था। यह एक ऐतिहासिक तथ्य है। मेरा इरादा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं था। हर बार कहा जाता है कि भारत के मुसलमानों के डीएनए में बाबर है। भारत के मुसलमान मुहम्मद साहब (पैगंबर मुहम्मद) को अपना आदर्श मानते हैं और सूफी परंपरा का पालन करते हैं। मेरा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं है।

कौन थे राणा सांगा

राणा सांगा जिन्हे महारणा ‘संग्राम सिंह’ के नाम से भी जाना जाता है राजस्थान के मेवाड शासक के राजा थे। इन्होंने 1509 से 1528 तक राजस्थान के मेवाड़ में राज किया था। बता दें राणा सांगा उदयपुर के सिसौदिया राजपूत राजवंश के राजा थे और राणा रायमल के सबसे छोटे बेटे थे। इन्होंने मेवाड़ साम्राज्य को बढ़ाया इतना ही नहीं इन्होंने राजपूताना के सभी राजाओं को संगठित किया, जो अलग-अलग पड़े थे। राणा सांगा ने विदेशी आक्रमणकारियों के विरुद्ध जंग लड़ने के लिए राजपूतों का एक समूह तैयार किया और इसके बाद इन्होंने दिल्ली गुजरात और मालवा मुगल बादशाहों के आक्रमण से अपने राज्य की रक्षा की।

सीएम योगी ने क्या प्रतिक्रिया दी?

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहां था- जिन्ना का महिमामंडन करने वालों का इतिहास हम जानते हैं। हमें याद है कि इसी उत्तर प्रदेश में हम जननायक वल्लभभाई पटेल की एकता के लिए अभियान के कार्यक्रम में शामिल हो रहे थे। हमने इसके लिए देश के सभी लोगों को आमंत्रित किया था। हमने भाजपा और सभी दलों को आमंत्रित किया था। एक तरफ सरदार वल्लभभाई पटेल, जो भारत की एकता के आदर्श हैं, भारत की एकता के प्रतीक हैं। हमने उनमें अपनी आस्था व्यक्त की, और इन लोगों ने जिन्ना का महिमामंडन किया। तो ये वही श्रेणी है, ये वही नस्ल है जो बाबर, औरंगजेब और जिन्ना की पूजा करती है हम भली-भांति समझ सकते हैं कि देश, भारत की विरासत और भारत के महापुरुषों के प्रति उनकी क्या भावनाएँ होंगी। ये लोग अवसरवादी भी हैं। इन्हें यू-टर्न लेने में देर नहीं लगेगी…ये लोग महाराणा प्रताप, राणा सांगा, छत्रपति शिवाजी महाराज और गुरु गोविंद सिंह के बारे में क्या जानते हैं? क्या ये हमें इतिहास पढ़ाएँगे? औरंगजेब और बाबर की पूजा करने वाले और जिन्ना को अपना आदर्श मानने वालों से हम कुछ भी उम्मीद नहीं कर सकते…

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