गर्मी और उमस के मौसम में कई लोगों को शरीर से तेज बदबू आने की समस्या होती है। आमतौर पर लोग मानते हैं कि पसीने से बदबू आती है, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार पसीने में खुद कोई गंध नहीं होती। असली वजह त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया होते हैं, जो पसीने में मौजूद तत्वों को तोड़कर ऐसे रसायन बनाते हैं, जिनसे बदबू पैदा होती है।
बैक्टीरिया कैसे पैदा करते हैं बदबू?
विशेषज्ञों के मुताबिक हमारी त्वचा पर प्राकृतिक रूप से लाखों बैक्टीरिया रहते हैं। जब शरीर से पसीना निकलता है, तो ये बैक्टीरिया उसमें मौजूद फैट और प्रोटीन को तोड़ते हैं। इस प्रक्रिया में कुछ रसायन बनते हैं, जिनकी वजह से शरीर से दुर्गंध आने लगती है। बदबू कितनी होगी, यह शरीर, त्वचा और जीवनशैली पर भी निर्भर करता है।
दो तरह की स्वेट ग्लैंड करती हैं अलग काम
शरीर में मुख्य रूप से दो तरह की स्वेट ग्लैंड होती हैं। पहली एक्राइन ग्लैंड, जो चेहरे, हथेलियों और माथे पर होती है। इससे निकलने वाला पसीना शरीर का तापमान नियंत्रित करने में मदद करता है और आमतौर पर इससे बदबू नहीं आती। दूसरी एपोक्राइन ग्लैंड बगल और जांघ जैसे हिस्सों में होती है। यहां का पसीना ज्यादा गाढ़ा होता है और इसी वजह से बदबू की संभावना बढ़ जाती है।
स्ट्रेस भी बढ़ा सकता है परेशानी
डॉक्टरों के अनुसार तनाव और चिंता भी शरीर की बदबू बढ़ा सकते हैं। स्ट्रेस की स्थिति में एपोक्राइन ग्लैंड ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं, जिससे ऐसा पसीना निकलता है जिसमें फैट और प्रोटीन अधिक होते हैं। यह बैक्टीरिया के लिए बेहतर माहौल बनाता है और दुर्गंध ज्यादा महसूस होने लगती है।
खानपान का भी पड़ता है असर
विशेषज्ञों का कहना है कि भोजन की आदतें भी शरीर की गंध को प्रभावित कर सकती हैं। अधिक मात्रा में प्याज, लहसुन और बहुत ज्यादा मसालेदार भोजन कुछ लोगों में शरीर की दुर्गंध बढ़ा सकते हैं। इसलिए संतुलित खानपान, पर्याप्त पानी और साफ-सफाई का ध्यान रखना फायदेमंद माना जाता है।
बदबू से बचने के लिए क्या करें?
अगर शरीर से लगातार तेज बदबू आती है, तो रोज नहाना, साफ कपड़े पहनना, अंडरआर्म्स को सूखा रखना और जरूरत पड़ने पर एंटीपर्सपिरेंट या डियोडोरेंट का इस्तेमाल मददगार हो सकता है। यदि अच्छी साफ-सफाई के बावजूद बदबू बनी रहती है या बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, तो किसी त्वचा विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर रहेगा, क्योंकि कभी-कभी इसके पीछे कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या भी हो सकती है।
