गाजियाबाद में गोद लिए गए एक बच्चे की कस्टडी को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। मोदीनगर निवासी राजीव शर्मा ने आरोप लगाया है कि उनके सास-ससुर ने बच्चे को अपना बताने के लिए फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनवा लिया। मामले की शिकायत नगर निगम की जनसुनवाई में की गई है और जांच की मांग की गई है।
पत्नी की मौत के बाद शुरू हुआ विवाद
राजीव शर्मा के अनुसार, उनकी शादी 2015 में हुई थी। संतान न होने पर वर्ष 2020 में एक नवजात बच्चे को गोद लिया गया था। 2023 में पत्नी की कैंसर से मौत के बाद बच्चे की कस्टडी को लेकर विवाद शुरू हो गया। उनका आरोप है कि इसके बाद नाना-नानी ने बच्चे पर अपना अधिकार जताना शुरू कर दिया।
फर्जी जन्म प्रमाणपत्र का आरोप
शिकायत के मुताबिक, जुलाई 2023 में नगर निगम से बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र बनवाया गया, जिसमें 70 से 75 वर्ष की उम्र वाले नाना और नानी को बच्चे का जैविक माता-पिता बताया गया। राजीव ने नगर आयुक्त को संबंधित दस्तावेज सौंपकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। फिलहाल इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कोर्ट के आदेश से बंटी कस्टडी
मामला अदालत तक पहुंचने के बाद अंतरिम व्यवस्था के तहत बच्चे की कस्टडी दोनों पक्षों में बांट दी गई। अदालत के आदेश के अनुसार बच्चा सप्ताह में तीन दिन पिता के साथ और चार दिन नाना-नानी के साथ रहता है। अंतिम फैसला अभी आना बाकी है।
दो स्कूलों में पढ़ने को मजबूर मासूम
कस्टडी बंटने का असर बच्चे की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। पिता ने बच्चे का दाखिला अपने घर के पास एक स्कूल में कराया, जबकि नाना-नानी ने दूसरे स्कूल में प्रवेश दिला दिया। ऐसे में बच्चा सप्ताह के अलग-अलग दिनों में दो अलग स्कूलों में पढ़ाई कर रहा है।
जांच के बाद ही होगी स्थिति साफ
नगर निगम के समक्ष शिकायत दर्ज होने के बाद अब जन्म प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया और दस्तावेजों की जांच की जाएगी। मामले में जांच पूरी होने और अदालत के अंतिम फैसले के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोप सही हैं या नहीं तथा बच्चे की स्थायी कस्टडी किसे मिलेगी।
