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पंचायत चुनाव का बिगुल बजने को तैयार, योगी ने खोल दी सबसे बड़ी चुनावी गांठ

पंचायत चुनाव का बिगुल बजने को तैयार, योगी ने खोल दी सबसे बड़ी चुनावी गांठ

उत्तर प्रदेश के गांवों में पिछले कई महीनों से एक ही सवाल सबसे ज्यादा सुनाई दे रहा था कि पंचायत चुनाव आखिर कब होंगे। गांव की चौपालों से लेकर चाय की दुकानों तक हर जगह इसी बात की चर्चा थी। ग्राम प्रधान से लेकर जिला पंचायत की तैयारी करने वाले चेहरे लगातार चुनावी तारीखों का इंतजार कर रहे थे। अब योगी सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसने पंचायत चुनाव की सबसे बड़ी बाधा को लगभग रास्ते से हटा दिया है और गांवों की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।

योगी सरकार ने खेल बदला

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी मिल गई है। यही वह मुद्दा था जिस पर पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया अटकी हुई थी। लंबे समय से ओबीसी आरक्षण को लेकर कानूनी स्थिति साफ नहीं थी और इसी कारण पंचायत चुनाव आगे नहीं बढ़ पा रहे थे। अब आयोग के गठन के बाद चुनावी रास्ता खुलता दिखाई दे रहा है और गांवों में फिर सियासी हलचल बढ़ गई है।

ट्रिपल टेस्ट बना था दीवार

दरअसल पंचायत चुनाव में पिछड़ा वर्ग आरक्षण लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के ट्रिपल टेस्ट नियम को पूरा करना जरूरी माना गया था। इसके लिए समर्पित आयोग बनाना सबसे अहम शर्त थी। बिना आयोग के चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती थी। अब सरकार ने यह कदम उठाकर सबसे बड़ी कानूनी अड़चन दूर कर दी है। इसके बाद पंचायत चुनाव को लेकर संभावित उम्मीदवार भी सक्रिय होते दिखाई देने लगे हैं।

अब शुरू होगा बड़ा सर्वे

हालांकि आयोग बन जाने के बाद कहानी यहीं खत्म नहीं होती। अब आयोग को प्रदेश के 75 जिलों में जाकर विस्तृत अध्ययन करना होगा। गांवों में पिछड़े वर्ग की आबादी, सामाजिक स्थिति और राजनीतिक भागीदारी को लेकर सर्वे होगा। माना जा रहा है कि यह प्रक्रिया कई महीनों तक चल सकती है। यानी चुनाव का रास्ता खुल गया है लेकिन चुनाव की तारीख अभी भी थोड़ी दूर दिखाई दे रही है।

सीटों पर फिर चलेगा गणित

आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ग्राम पंचायत, ब्लॉक पंचायत और जिला पंचायत की सीटों पर आरक्षण और रोटेशन का पूरा गणित तैयार होगा। किस सीट पर कौन चुनाव लड़ेगा और किस वर्ग को प्रतिनिधित्व मिलेगा इसका फैसला बाद में होगा। इसके लिए आपत्तियां मांगी जाएंगी और अंतिम सूची जारी की जाएगी। यानी अभी चुनावी मंजिल तक पहुंचने से पहले कई प्रक्रियाएं बाकी हैं।

अब गांवों में बढ़ी हलचल

फिलहाल इतना जरूर साफ हो गया है कि पंचायत चुनाव का रुका पहिया अब फिर घूमने लगा है। गांवों में संभावित उम्मीदवार सक्रिय हो रहे हैं और चौपालों पर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो चुकी हैं। योगी सरकार ने सबसे बड़ी दीवार तोड़ दी है लेकिन चुनावी कहानी का अगला अध्याय अभी बाकी दिखाई दे रहा है।

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