स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में चल रहा तनाव अब जल्द खत्म होता नहीं दिख रहा है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने संसद को जानकारी दी है कि इस अहम समुद्री रास्ते को पूरी तरह सुरक्षित बनाने में करीब 6 महीने तक का समय लग सकता है। इसका मतलब साफ है कि अगर अभी शांति समझौता हो भी जाए, तब भी यहां जहाजों की आवाजाही सामान्य होने में लंबा वक्त लगेगा। समुद्र में बिछाई गई माइंस को हटाना आसान नहीं है और यही वजह है कि यह संकट लंबे समय तक बना रह सकता है।
तेल आपूर्ति पर सीधा असर
होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में गिना जाता है, जहां से करीब 20 प्रतिशत वैश्विक तेल सप्लाई गुजरती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। जापान, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी रास्ते पर निर्भर हैं। अब जब यहां खतरा बना हुआ है, तो तेल की कीमतों में उछाल आना तय माना जा रहा है और इसका असर आम लोगों तक पहुंच रहा है।
अमेरिका में भी बढ़ी कीमतों की मार
इस संकट का असर अमेरिका में भी साफ दिख रहा है। वहां पेट्रोल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। कुछ समय पहले जहां एक गैलन पेट्रोल की कीमत 2.98 डॉलर थी, वहीं अब यह बढ़कर 4.02 डॉलर तक पहुंच गई है। सरकार का मानना है कि हालात जल्दी सामान्य नहीं होंगे और लोगों को राहत मिलने में अभी समय लग सकता है। इससे साफ है कि होर्मुज का तनाव केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक संकट का कारण बन रहा है।
अमेरिका और ईरान के बीच टकराव जारी
इस पूरे मामले में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह बंद करे और समुद्री रास्ता खोल दे। वहीं ईरान का कहना है कि जब तक उस पर लगी पाबंदियां खत्म नहीं होंगी, तब तक वह बातचीत नहीं करेगा। इसी टकराव के चलते हालात और बिगड़ते जा रहे हैं और समुद्र में खतरा लगातार बना हुआ है।
जहाजों के लिए बना खतरनाक रास्ता
एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक समुद्र में माइंस मौजूद हैं, तब तक इस रास्ते से जहाजों का गुजरना बेहद जोखिम भरा रहेगा। कुछ समय के लिए युद्धविराम के दौरान आवाजाही शुरू हुई थी, लेकिन हालिया फायरिंग के बाद फिर से स्थिति खराब हो गई है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि कब यह रास्ता पूरी तरह सुरक्षित होगा, क्योंकि इससे वैश्विक व्यापार और तेल सप्लाई दोनों पर सीधा असर पड़ रहा है।
