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जंग के साए ने बिगाड़ा बाजार का मूड, तेजी पर लगा ब्रेक, ग्लोबल टेंशन ने उड़ाए निवेशकों के होश, अब आगे क्या ?

जंग के साए ने बिगाड़ा बाजार का मूड, तेजी पर लगा ब्रेक, ग्लोबल टेंशन ने उड़ाए निवेशकों के होश, अब आगे क्या ?

गुरुवार को शेयर बाजार में आई बड़ी गिरावट की सबसे बड़ी वजह ईरान और अमेरिका के बीच कमजोर पड़ता युद्धविराम है। शांति की उम्मीदों ने पहले बाजार को राहत दी थी, लेकिन अब हालात फिर बिगड़ते दिख रहे हैं। इजराइल और लेबनान में जारी हमलों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद रहने से वैश्विक चिंता बढ़ गई है। इससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ और बाजार में बिकवाली बढ़ गई।

कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाया दबाव
दूसरी बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। पहले जहां तेल की कीमतें गिरकर राहत दे रही थीं, वहीं अब फिर से उछाल देखने को मिल रहा है। ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई दोनों में तेजी आई है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका तेज हो गई है। तेल महंगा होने का सीधा असर कंपनियों की लागत और मुनाफे पर पड़ता है, जिससे निवेशकों ने शेयर बेचने शुरू कर दिए।

दुनियाभर के बाजारों से मिला निगेटिव संकेत
वैश्विक बाजारों में कमजोरी का असर भी भारतीय बाजार पर साफ दिखा। निक्केई, हैंगसेंग, कोस्पी और शंघाई कंपोजिट सभी लाल निशान में बंद हुए। वहीं अमेरिकी बाजार के संकेत भी कमजोर रहे, जिससे भारतीय निवेशकों का भरोसा और डगमगा गया।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी
बाजार में गिरावट की एक और अहम वजह विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली है। विदेशी संस्थागत निवेशक पिछले कई सत्रों से भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। एक ही दिन में हजारों करोड़ रुपये की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बना दिया। हालांकि घरेलू निवेशक खरीदारी कर रहे हैं, लेकिन विदेशी निवेशकों के निकलने से बाजार की धार कमजोर पड़ रही है।

रुपये की कमजोरी भी बनी कारण
भारतीय रुपये में आई कमजोरी ने भी बाजार की गिरावट को बढ़ाया। डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने से विदेशी निवेशकों का भरोसा कम होता है और पूंजी बाहर जाने लगती है। इससे बाजार में और गिरावट देखने को मिलती है।

प्रॉफिट बुकिंग ने तोड़ी तेजी
लगातार पांच दिनों की शानदार तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफा वसूलना शुरू कर दिया। इसे ‘प्रॉफिट बुकिंग’ कहा जाता है। जब बाजार तेजी से ऊपर जाता है, तो निवेशक अपने फायदे को सुरक्षित करने के लिए शेयर बेच देते हैं, जिससे गिरावट आती है।

आगे क्या रहेगा रुख
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव कम होता है, तो बाजार फिर संभल सकता है। लेकिन अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो तेल की कीमतें और बढ़ेंगी और बाजार पर दबाव बना रहेगा। फिलहाल निवेशकों को घबराने के बजाय धैर्य रखने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि गिरावट के दौर में अच्छे शेयर सस्ते मिलते हैं और भविष्य में फायदा दे सकते हैं।

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