होर्मुज जलडमरूमध्य में शनिवार को 20 से ज्यादा जहाजों की आवाजाही दर्ज की गई, जो 1 मार्च के बाद सबसे बड़ी संख्या मानी जा रही है। शिपिंग डेटा के अनुसार इन जहाजों में तेल, गैस और अन्य जरूरी सामान ले जाने वाले बड़े मालवाहक शामिल थे। यह मार्ग वैश्विक सप्लाई के लिए बेहद अहम है, क्योंकि दुनिया का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से ऊर्जा संसाधनों पर निर्भर करता है।
भारत और एशिया की ओर बढ़े जहाज
इन जहाजों में कई ऐसे भी थे जो ईरान से जुड़े माल लेकर आगे बढ़े। तेल, धातु और एलपीजी से भरे जहाज एशियाई देशों की ओर जा रहे थे। एक जहाज भारत की ओर और दूसरा चीन की ओर रवाना हुआ। वहीं भारतीय जहाज Desh Garima यूएई से करीब 7.8 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर श्रीलंका की ओर बढ़ रहा है। इससे साफ है कि इस मार्ग का एशियाई देशों के लिए कितना महत्व है।
दुनिया के कई देशों के जहाज शामिल
इस दौरान पनामा, बहरीन, लाइबेरिया और सऊदी अरब समेत कई देशों के जहाज भी इस मार्ग से गुजरे। कुछ जहाज एलपीजी लेकर इंडोनेशिया जा रहे थे, तो कुछ रिफाइंड तेल लेकर अफ्रीका और एशिया के अलग-अलग हिस्सों की ओर बढ़ रहे थे। दक्षिण कोरिया, ताइवान और इटली जैसे देशों के लिए भी बड़े टैंकर इस रास्ते से रवाना हुए। इससे साफ है कि यह मार्ग वैश्विक व्यापार की रीढ़ बना हुआ है।
अमेरिका-ईरान तनाव बरकरार
इस हलचल के बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव भी लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका ने दावा किया है कि उसने करीब 25 ईरानी जहाजों को रोका या वापस भेजा। वहीं ईरान ने आरोप लगाया कि उसने अमेरिकी जहाजों पर ड्रोन हमला किया है। हालांकि इस हमले में नुकसान की स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
बढ़ सकता है संकट का असर
इसी दौरान अमेरिका ने ईरान के एक बड़े जहाज को रोककर अपने कब्जे में ले लिया, जिससे विवाद और गहरा गया है। ईरान ने इस कार्रवाई को गलत बताते हुए इसे समुद्री डकैती कहा है। ऐसे हालात में अगर तनाव और बढ़ता है, तो इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर असर पड़ सकता है। फिलहाल स्थिति संवेदनशील बनी हुई है और दुनिया की नजर इस पर टिकी हुई है।
