दुनिया में बढ़ते जियो-पॉलिटिक तनाव के बीच अब ज्यादातर देश सुरक्षित निवेश की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। इस बदलाव का सबसे बड़ा संकेत गोल्ड की बढ़ती खरीद है। केंद्रीय बैंक लगातार सोना जमा कर रहे हैं ताकि आर्थिक अस्थिरता के दौर में अपनी स्थिति मजबूत रख सकें। पहले यह रुझान केवल बड़े देशों तक सीमित था, लेकिन अब छोटे देश भी तेजी से इस दौड़ में शामिल हो गए हैं और अपनी रणनीति बदलते नजर आ रहे हैं।
छोटे देशों ने मचाया बड़ा उलटफेर
हाल के आंकड़ों ने सबको चौंका दिया है, क्योंकि कुछ छोटे देशों ने गोल्ड खरीद में बड़े देशों को पीछे छोड़ दिया है। खासतौर पर पोलैंड और उज्बेकिस्तान ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इन देशों ने न सिर्फ अपने गोल्ड रिजर्व को तेजी से बढ़ाया है बल्कि मासिक खरीद के मामले में भारत और चीन जैसे बड़े खिलाड़ियों को भी पीछे छोड़ दिया है।
पोलैंड की आक्रामक रणनीति
फरवरी महीने में पोलैंड ने 20 टन सोने की खरीद की, जो उस महीने की सबसे बड़ी खरीद मानी जा रही है। इस खरीद के बाद पोलैंड का कुल गोल्ड रिजर्व 570 टन तक पहुंच गया है। खास बात यह है कि पिछले एक साल में ही पोलैंड ने करीब 102 टन सोना जोड़ा है, जो उसकी दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति को दर्शाता है। यह कदम बताता है कि देश भविष्य की अनिश्चितताओं के लिए खुद को तैयार कर रहा है।
उज्बेकिस्तान भी पीछे नहीं
पोलैंड के साथ-साथ उज्बेकिस्तान भी इस दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रहा है। फरवरी में इस देश ने 8 टन सोने की खरीद की, जिससे उसका कुल भंडार 407 टन हो गया। साल 2025 के दौरान भी उज्बेकिस्तान ने लगातार सोना जोड़ा और अपने रिजर्व को मजबूत किया। यह दर्शाता है कि छोटे देश अब आर्थिक सुरक्षा के लिए गोल्ड को प्राथमिकता दे रहे हैं।
बड़े देशों की धीमी रफ्तार
दूसरी ओर भारत और चीन जैसे बड़े देशों की गोल्ड खरीद अपेक्षाकृत धीमी रही है। फरवरी में भारत ने केवल 0.2 टन सोना खरीदा, जबकि चीन ने सिर्फ 1 टन की खरीद की। हालांकि, कुल भंडार के मामले में चीन अभी भी सबसे आगे है, जिसके पास 2305 टन सोना है। लेकिन मासिक खरीद के आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि छोटे देश अब इस रेस में तेजी से आगे निकल रहे हैं और वैश्विक आर्थिक संतुलन में नया बदलाव ला सकते हैं।
