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बिहार की तर्ज पर 12 राज्यों में SIR अभियान: चुनाव आयोग का बड़ा ऐलान, आज रात से फ्रीज होगी वोटर लिस्ट!

बिहार की तर्ज पर 12 राज्यों में SIR अभियान: चुनाव आयोग का बड़ा ऐलान, आज रात से फ्रीज होगी वोटर लिस्ट!

चुनाव आयोग ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष गहन संशोधन (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन - SIR) अभियान शुरू करने का फैसला किया है। यह कदम बिहार में सफलतापूर्वक चलाए गए SIR अभियान की तर्ज पर उठाया गया है, जहां लाखों अवैध वोटरों की पहचान कर मतदाता सूची को शुद्ध किया गया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि आज रात 12 बजे से इन 12 राज्यों की वोटर लिस्ट फ्रीज हो जाएगी। मतदान केंद्र स्तर के अधिकारी (बूथ लेवल ऑफिसर - BLO) प्रत्येक वोटर की कम से कम तीन बार जांच करेंगे, ताकि डुप्लिकेट, मृत या अयोग्य वोटरों को हटाया जा सके।

चुनाव आयोग के इस फैसले से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। विपक्षी दल इसे 'वोटर हटाओ अभियान' बता रहे हैं, जबकि सत्ताधारी पक्ष इसे लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक मान रहा है। SIR का उद्देश्य केवल वोटरों की संख्या घटाना नहीं, बल्कि हर योग्य नागरिक को मताधिकार सुनिश्चित करना है। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 324 और 326 तथा प्रतिनिधित्व ऑफ द पीपल एक्ट की धारा 21 के तहत की जा रही है।

12 राज्य कहां-कहां शामिल?

चुनाव आयोग ने SIR के दूसरे चरण में 12 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों का चयन किया है, जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, असम, पुदुच्चेरी, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, ओडिशा, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश शामिल हैं। ये राज्य आयोग की प्राथमिकता सूची में हैं, क्योंकि यहां शहरीकरण, प्रवास और जनसंख्या परिवर्तन के कारण मतदाता सूची में त्रुटियां आम हैं। बर्फीले इलाकों जैसे जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और लद्दाख को इससे बाहर रखा गया है, जबकि महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों के कारण विलंब हो सकता है।

https://twitter.com/ECISVEEP/status/1982768960308400144

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, "SIR का लक्ष्य है कि हर योग्य नागरिक वोट डाल सके, लेकिन अवैध प्रवासियों या डुप्लिकेट एंट्री को मतदाता सूची से बाहर किया जाए। बिहार में हमने 68 लाख नाम हटाए, लेकिन 21 लाख नए नाम जोड़े, जिससे नेट 47 लाख की सफाई हुई। यही मॉडल अब पूरे देश में लागू होगा।" आयोग के अनुसार, पिछले दो दशकों में यह पहली बड़ी संशोधन प्रक्रिया है। 1951 से अब तक आठ बार SIR हो चुका है, लेकिन अंतिम बड़ा संशोधन 2002-2004 के बीच था।

प्रक्रिया कैसे चलेगी? वोटर लिस्ट फ्रीज का मतलब

आज रात मध्यरात्रि से शुरू हो रही फ्रीज प्रक्रिया का मतलब है कि अब कोई नया नाम जोड़ा या हटाया नहीं जाएगा, जब तक SIR पूरा न हो। गणना चरण (एन्यूमरेशन फेज) 1 नवंबर से शुरू होगा, जिसमें BLO घर-घर जाकर Enumeration Form (EF) भरवाएंगे। प्रत्येक BLO को लगभग 1,000 वोटरों का जिम्मा सौंपा जाएगा। वे कम से कम तीन बार प्रत्येक घर का दौरा करेंगे - पहली बार फॉर्म भरने के लिए, दूसरी बार सत्यापन के लिए और तीसरी बार अंतिम पुष्टि के लिए।

https://twitter.com/ECISVEEP/status/1982769144409014674

BLO का काम केवल नाम इकट्ठा करना नहीं होगा। वे फॉर्म 6 (नए वोटरों के लिए), घोषणा फॉर्म और EF भरने में मदद करेंगे। मृत वोटरों, स्थायी रूप से स्थानांतरित हुए लोगों और बहु-नामांकन की पहचान करेंगे। शहरी वोटरों और अस्थायी प्रवासियों को ऑनलाइन EF सबमिशन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। दस्तावेजों की कोई सख्ती नहीं - आधार केवल पहचान प्रमाण के रूप में स्वीकार्य होगा, लेकिन सूची संकेतात्मक है।

मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद दावे-अपील की अवधि होगी। अंतिम सूची जनवरी के अंत या फरवरी 2026 के प्रारंभ तक तैयार हो जाएगी। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO, आमतौर पर एसडीएम स्तर का अधिकारी) होगा, जो मसौदा और अंतिम सूची तैयार करेगा। सहायक ERO तहसील स्तर पर काम करेंगे। अपील के लिए पहला स्तर जिला मजिस्ट्रेट और दूसरा राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास है।

बिहार मॉडल

SIR का आधार बिहार है, जहां जून 2024 में शुरू हुए अभियान ने 7.89 करोड़ से घटाकर 7.42 करोड़ वोटर कर दिए। लेकिन यह विवादास्पद रहा। विपक्ष ने आरोप लगाया कि दस्तावेजों की कमी से लाखों गरीब और प्रवासी वोटर अयोग्य घोषित हो गए। कांग्रेस और अन्य दलों ने इसे 'लोकतंत्र पर हमला' कहा। सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप कर निर्देश दिया कि कोई भी योग्य वोटर बाहर न हो। आयोग ने बिहार में दो समीक्षा बैठकें कीं और राजनीतिक दलों से बूथ-स्तरीय एजेंट तैनात करने को कहा।

अब राष्ट्रीय स्तर पर यही चुनौतियां हैं। शहरीकरण से लाखों लोग एक राज्य से दूसरे में चले जाते हैं, जिससे डुप्लिकेट एंट्री बढ़ती है। प्रवासियों के नाम हटाने से असम जैसी संवेदनशील जगहों पर तनाव हो सकता है। आयोग ने कहा कि 50-70% वोटर पहले से मैप हो चुके हैं और डिजिटलीकरण लगभग पूरा है। राजनीतिक दलों को सक्रिय भागीदारी के लिए कहा गया है, ताकि न्यूनतम असुविधा हो।

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