प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने 5 देशों के अहम विदेश दौरे पर निकल चुके हैं। शुक्रवार को वह यूएई रवाना हुए, जहां उनकी मुलाकात यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से होनी है। यह यात्रा रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, तकनीक और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा होगी।
भारत-यूएई रिश्तों को मिली रफ्तार
2022 में हुए सीईपीए समझौते के बाद भारत और यूएई के रिश्तों को नई मजबूती मिली है। पिछले 4 वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यूएई अब भारत के प्रमुख आर्थिक साझेदारों में शामिल हो चुका है। दोनों देश निवेश और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर लगातार सहयोग बढ़ा रहे हैं।
यूएई मंत्री ने जताई खुशी
यात्रा से पहले यूएई की अंतरराष्ट्रीय सहयोग राज्य मंत्री रीम अल हाशिमी ने प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा को लेकर उत्साह जताया। उन्होंने कहा कि इस यात्रा का सभी को इंतजार है। उन्होंने भारत और यूएई के मजबूत संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि लगभग हर अमीराती नागरिक का किसी न किसी रूप में भारत से जुड़ाव देखने को मिलता है।
ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ी चर्चा
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच ऊर्जा सुरक्षा बड़ा मुद्दा माना जा रहा है। ऐसे समय में यह दौरा भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण हो सकता है। माना जा रहा है कि तेल और गैस आपूर्ति को लेकर भी अहम बातचीत हो सकती है। विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर फोकस रहेगा।
यूएई के बाद यूरोप दौरा
यूएई यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा करेंगे। यह पूरा दौरा 15 मई से 20 मई तक चलेगा। इन देशों के साथ व्यापार, रक्षा, हरित ऊर्जा और तकनीकी साझेदारी जैसे कई अहम विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।
कई मोर्चों पर नजर
प्रधानमंत्री मोदी का यह विदेश दौरा सिर्फ औपचारिक यात्रा नहीं माना जा रहा है। बदलते वैश्विक हालात, ऊर्जा संकट और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के बीच भारत अपनी भूमिका और मजबूत करने की कोशिश में है। आने वाले दिनों में इन बैठकों के परिणाम कई बड़े रणनीतिक फैसलों का आधार बन सकते हैं।
