पेट्रोल-डीजल पर सियासी संग्राम तेज, कीमतों में बढ़ोतरी के बाद विपक्ष ने सरकार पर बोला हमला, राहुल-अखिलेश ने ये कहा ?
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ताजा बढ़ोतरी के बाद देश की राजनीति गरमा गई है। तेल के दाम बढ़ने के साथ ही विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर हमला तेज कर दिया है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस ने इसे आम जनता पर आर्थिक बोझ बताते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक इस मुद्दे पर तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।
कांग्रेस ने साधा निशाना
कांग्रेस ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर सरकार पर तीखा तंज कसा। पार्टी ने लिखा कि महंगाई फिर जनता पर भारी पड़ रही है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव खत्म होते ही जनता पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया गया। राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गलती सरकार की है लेकिन कीमत जनता को चुकानी पड़ रही है। उनके बयान के बाद यह मुद्दा और ज्यादा चर्चा में आ गया।
सपा ने उठाया साइकिल मुद्दा
समाजवादी पार्टी ने भी सरकार पर हमला बोलते हुए इसे जनता विरोधी फैसला बताया। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने अंदाज में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आगे बढ़ना है तो साइकिल ही सबसे बेहतर विकल्प है। पार्टी ने बयान जारी कर कहा कि जनता पहले ही गैस और बिजली की महंगाई झेल रही है और अब ईंधन के बढ़े दाम लोगों की मुश्किलें और बढ़ाएंगे।
टीएमसी ने भी घेरा
तृणमूल कांग्रेस भी इस मुद्दे पर पीछे नहीं रही। पार्टी के वरिष्ठ नेता डेरेक ओ ब्रायन ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पहले जनता से वोट लिया जाता है और फिर उसी जनता पर आर्थिक बोझ डाल दिया जाता है। साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल में वैट कटौती को लेकर भी सवाल खड़े किए और केंद्र की आर्थिक नीतियों पर निशाना साधा।
नेताओं के बयान तेज
कांग्रेस नेता कुमारी सैलजा ने भी सरकार पर सीधा हमला करते हुए कहा कि चुनाव के दौरान राहत और चुनाव के बाद बोझ डालना सरकार की पहचान बन चुका है। विपक्ष लगातार यह मुद्दा उठाने की कोशिश कर रहा है कि महंगाई का सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ता है और इसका असर रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखाई देता है।
सियासत और तेज होगी
ईंधन की कीमतों का मुद्दा पहले भी कई बार राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका है। इस बार भी बढ़ी कीमतों के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर ली है। आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक इस मुद्दे पर सियासी लड़ाई और तेज होती दिख सकती है।
