राजस्थान के झुंझुनूं जिले के छोटे से गांव से निकले मुकुल चौधरी आज आईपीएल 2026 में सुर्खियों में हैं। लेकिन यह सिर्फ एक खिलाड़ी की कहानी नहीं, बल्कि उनके पिता के संघर्ष और भरोसे की कहानी भी है। मुकुल के पिता ने बेटे के जन्म से पहले ही तय कर लिया था कि वह उसे क्रिकेटर बनाएंगे। यही सपना उनके जीवन का लक्ष्य बन गया।
नाकामी के बीच भी नहीं टूटा हौसला
मुकुल के पिता ने कई साल तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने दूसरे कामों में हाथ आजमाया, लेकिन हालात साथ नहीं दे पाए। आर्थिक परेशानी बढ़ती गई, लेकिन उन्होंने अपने बेटे का सपना नहीं छोड़ा। संघर्ष के बीच भी उनका फोकस सिर्फ एक ही था—मुकुल को क्रिकेट में आगे बढ़ाना।
घर बिका, कर्ज बढ़ा, फिर भी जारी रहा सफर
2016 में बेहतर ट्रेनिंग के लिए मुकुल को दूसरी जगह भेजा गया, जहां से असली संघर्ष शुरू हुआ। पैसों की कमी के चलते उनके पिता ने अपना घर तक बेच दिया और पूरा पैसा बेटे के करियर में लगा दिया। बाद में कारोबार के लिए कर्ज लिया, लेकिन हालात इतने बिगड़े कि उन्हें जेल तक जाना पड़ा। बावजूद इसके उन्होंने हार नहीं मानी और बेटे पर भरोसा बनाए रखा।
तानों के बीच भी नहीं डगमगाया भरोसा
मुश्किल समय में रिश्तेदारों ने भी साथ छोड़ दिया और ताने मिलने लगे कि जिंदगी बर्बाद हो रही है। लेकिन इन सब बातों ने पिता के हौसले को कमजोर नहीं किया। दूसरी ओर मुकुल ने भी इन संघर्षों को करीब से देखा और ठान लिया कि वह एक दिन सबकुछ बदलकर दिखाएंगे।
आईपीएल में मिला बड़ा मौका
जब लखनऊ सुपर जायंट्स ने मुकुल को आईपीएल में मौका दिया, तो यह उनके लिए बड़ा अवसर था। उन्होंने खुद से वादा किया कि सबसे पहले पिता का कर्ज चुकाएंगे। शुरुआती दबाव के बीच एक मैच में वह सफल नहीं हो पाए, जिससे वह भावुक हो गए। लेकिन पिता से बात करने के बाद उन्होंने खुद को संभाला और अगली ही पारी में शानदार प्रदर्शन किया।
संघर्ष से निकला असली फिनिशर
मुकुल की बल्लेबाजी में आत्मविश्वास और फिनिशिंग की झलक साफ दिखती है, जिसका असर उनके आदर्श महेंद्र सिंह धोनी से जुड़ा है। घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्होंने आईपीएल में खुद को साबित किया। ईडन गार्डन्स की वह पारी सिर्फ एक जीत नहीं थी, बल्कि सालों के संघर्ष, कर्ज और एक पिता के अटूट विश्वास का नतीजा थी। मुकुल ने उस रात सिर्फ मैच नहीं जीता, बल्कि अपने पिता के सपने को नई पहचान दे दी।
