logo

BREAKING NEWS
Maalik Movie Review: गैंगस्टर अवतार मे नजर आए  राजकुमार, जाने कैसी है 'मालिक' की कहानी?

Maalik Movie Review: गैंगस्टर अवतार मे नजर आए राजकुमार, जाने कैसी है 'मालिक' की कहानी?

बाॅलीवुड एक्टर राजकुमार राव की फिल्म 'मालिक' सिनेमाघरों में आज रिलीज हो चुकी है। पुलकित के डायरेक्शन में बनी फिल्म मालिक” में पहली बार एक्टर एक गैंगस्टर की भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं। एक्टर के अलावा मानुषी छिल्लर, सौरभ शुक्ला, अंशुमान पुष्कर, प्रोसेनजीत चटर्जी, स्वानंद किरकिरे और हुमा कुरैशी की अहम भूमिका दिखाई दी है।

बता दें फिल्म 'मालिक' का डायरेक्शन पुलकित ने किया है, जो अपनी तेज और इमोशनल थ्रिलर फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। वहीं इसके प्रोड्यूसर कुमार तौरानी हैं। फिल्म में राजकुमार का इंटेंस लुक देखने मिल रहा है। फिल्म मालिक एक एक्शन से भरपूर क्राइम थ्रिलर है, जो सत्ता, वफादारी और विश्वासघात की कहानी को दर्शाती है.

फिल्म ऐसी कड़वी सच्चाई पर आधारित कहानी है, जिसमें महत्वाकांक्षा, ताकत और ज़िंदगी की जंग दिखाई गई है. फिल्म दिखाती है कि उस दुनिया में ऊंचा उठने की क्या कीमत चुकानी पड़ती है, जहां बंदूक, लालच और वफादारी का राज चलता है राजकुमार राव की 'मालिक' की कहानी एक ऐसे ही शख्स की है, जिसका आर्थिक और सामाजिक कद छोटा है लेकिन उम्मीदों की उड़ान नहीं। ऐसे में शॉर्टकट से सक्सेस तो मिलता है लेकिन किस कीमत पर? जैसे-जैसे फिल्म में राजकुमार राव का किरदार ताकत की ऊंचाइयों की ओर बढ़ता है, वैसे-वैसे उसका सफर और भी खतरनाक होता चला जाता है।

फ़िल्म का माहौल तनाव पैदा करता है, खासकर जब एक प्रतिद्वंदी गैंगस्टर मालिक के इलाके पर कब्ज़ा करने की कोशिश करता है। लेकिन फ़िल्म जल्द ही लड़खड़ाने लगती है। एक संभावित गैंगस्टर महाकाव्य के रूप में शुरू होने वाली यह फ़िल्म जल्द ही अपनी धार खो देती है और एक उलझी हुई कहानी में बदल जाती है एक कुख्यात गैंगस्टर का राज, एक सीधा-सादा पुलिसवाला जिसके नाम कई मुठभेड़ें, एक राजनीतिक गठजोड़ और एक अंतिम हिसाब-किताब। लगभग दो दशक पहले अरशद वारसी और सुशांत सिंह की प्रमुख भूमिकाओं वाली 'सहर' भी कहीं ज़्यादा नियंत्रण और प्रामाणिकता के साथ इसी राह पर चलती है। 'मालिक' में हमें अफ़सर प्रभु दास (प्रसेनजीत) मिलते हैं, जो इस गंदगी को साफ़ करने के मिशन पर एक ट्रांसफ़र पुलिसवाला है, और एक राजनेता, शंकर सिंह (सौरभ शुक्ला), एक अनुभवी राजनेता, जिसने कभी दीपक को प्रशिक्षित किया था। लेकिन सब कुछ उधार लिया हुआ और अधपका लगता है। पटकथा बेढंगेपन से एक दृश्य से दूसरे दृश्य में कूदती है, किसी भी पल को सांस लेने का मौका नहीं देती। गैंगस्टर फिल्मों को श्रद्धांजलि खासकर टोनी मोंटाना-शैली के विस्फोट प्राकृतिक से ज़्यादा बनावटी लगते हैं। आप देख सकते हैं कि निर्देशक तीव्रता की नकल करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन वह कभी जम नहीं पाता। इस फिल्म को न्यूजप्लस ने 5 में से 3.5 स्टार रेटिंग दी है।

Leave Your Comment